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‘बुक्स ट्री’: जानिए बच्चों को नई किताबें पढ़ने को कैसे मिला प्रोत्साहन?



एक शिक्षक के रूप में हम सभी प्रतिदिन किसी ना किसी समस्या से रूबरू होते ही रहते हैं। पाठ्यक्रम आधारित कक्षा-शिक्षण ही कक्षा की प्राथमिकता बन कर रह गया है जिस कारण हमारे कक्षा-कक्ष छात्रों को उबाऊ और अर्थहीन प्रतीत होते हैं। छोटी कक्षा के छात्र आपको अपने शैक्षणिक प्रगति में बाधक समस्याओं के बारे में नहीं बताते हैं या हम यह कह  सकते है कि उन्हें पता ही नहीं चलता है कि वह किसी समस्या से ग्रसित है और इस समस्या का हल हो भी सकता है।

शिक्षक के रूप में हमारी भूमिका

शिक्षक के रूप में हमारा यह दायित्व बनता है कि हम उनकी समस्याओं के बारे में पता करें और उनका समाधान करें। मैं अपनी कक्षा के बच्चों की पुस्तकालय के संबंध में एक समस्या के बारे में आपको बताता हूं। मैंने देखा कि पुस्तकालय के कालांश में या जब भी बच्चों को पुस्तक पढ़ने का अवसर प्राप्त होता है तो वे केवल चुनिंदा पुस्तकों को ही पढ़ते हैं। अगर वास्तव में देखा जाए कि जब भी छात्रों को कोई  कहानी सुननी होती है तो वह हमेशा नई-नई कहानी सुनना चाहते हैं। किन्तु जब पढ़ने की बारी आती है तो वह चुनिंदा पुस्तकों का ही चुनाव कर रहे हैं। पहली नजर में यह आम बात लग सकती है।

लेकिन जब मैंने इस बारे में कक्षा-कक्ष का अवलोकन किया तो मुझे समस्या का मूल कारण पता चला। हमारे विद्यालय का पुस्तकालय एक बोर्ड पर फ्रेम के रूप में दीवार पर लगा हुआ है जिसमे चार रैक हैं। ऊपर के दो रैक छोटी कक्षाओं के बच्चों की हाइट से अधिक ऊंचाई पर है जिसकी वजह से वह उन दो रैक में रखी पुस्तकों को स्वयं से नही ले पाते थे। इसके साथ ही सामान साइज़ की पुस्तकें एक साथ बंडल के रूप में रखी हुई हैं। इसके कारण बंडल में ऊपर लगी हुई पुस्तकों को बच्चे बार बार पढने के लिए ले लेते हैं।  

ऐसी स्थिति का समाधान खोजने के लिए मैंने रैक में रखी पुस्तकों को आपस में बदल दिया। इसके साथ ही बंडलो को भी पुनर्व्यवस्थित कर दिया है। अब बच्चे पढ़ने के लिए नई पुस्तकों का चुनाव कर रहे हैं। हमारा काम छात्रो को संसाधन उपलब्ध करा देना मात्र ना होकर उन्हें संसाधन का समुचित उपयोग करना सिखाना भी है।

नई किताबों से बच्चों को जोड़ने की रोचक पहल बनी ‘बुक ट्री’

इसी प्रकार पिछले दिनों पुस्तकालय में कुछ नई पुस्तक आई उन पुस्तकों को छात्रों से रूबरू कराने के लिए मेरे मन में एक विचार आया कि क्यों ना इस बार इन पुस्तकों से बच्चों को नए तरीके से रूबरू कराया जाए। पारंपरिक तौर पर पुस्तकालय में आई नई पुस्तकों को पुस्तकालय में पूर्व में रखी पुस्तकों के साथ रख दिया जाता है, मेरे मन में विचार आया कि जब पुस्तकालय में नई पुस्तकें आई हैं तो उनका परिचय बच्चो के साथ भी नए तरीके से किया जाए।

हमने प्राथमिक विद्यालय बंगला पूठरी, बुलंदशहर में “बुक्स-ट्री” गतिविधि का आयोजन किया। इसके अंतर्गत विद्यालय प्रांगण में लगे कदम्ब के पेड़ की टहनियों पर रस्सियों की मदद से क्लिप लटकाई गयी। इन क्लिपों की मदद से बहुत सी पुस्तकों को टांग दिया गया। अब छात्र अपनी इच्छा से किसी भी पुस्तक को उलट पलट के देख सकते थे। जिस प्रकार बच्चे पेड़ पर लटके हुए फलों में से अपने पसंदीदा फल को चुनकर एवं तोड़कर खाते है उसी प्रकार पेड़ो पर लटकी हुई विभिन्न विधाओं की पुस्तकों में से अपनी पसंद की पुस्तक का चुनाव करके पढ़ सकते हैं।

बच्चों ने पढ़ीं अपनी पसंद की किताबें

इस गतिविधि का मूल उद्देश्य बच्चो को अपनी पसंद की पुस्तकों को स्वयं से चुनने एवं पढने के मौके देना था। ‘बुक्स ट्री’ की गतिविधि के दौरान इस बार बच्चों ने चकमक , साईकिल ,दोस्त , बरस्ता तरबूज , बैठ जाओ मैटी , मैटी बैठ जाओ , अचरज बंगला ,छीका छींक , अकल बड़ी या भैंस ,ये सारा उजाला सूरज का , नाना-नानी जैसी अपनी पसंद की किताबें पढ़ीं।

इस गतिविधि का मूल उद्देश्य यह था कि जिस प्रकार बच्चे फलों की टोकरी में से अपने मन पसंदीदा फल को चुनकर खा लेते हैं इसी प्रकार बुक्स ट्री बच्चों को अपनी इच्छा अनुसार पुस्तक को चुनकर पढ़ सकें। इस गतिविधि में सभी बच्चों द्वारा बहुत ही बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया गया एवं सभी बच्चों ने बहुत रुचि पूर्ण ढंग से अपनी पुस्तकों का चुनाव किया। प्रकृति की गोद में बैठकर पढने का आनंद प्राप्त किया। आगे भी हम इसी प्रकार पाठ्यक्रम के  साथ साथ अपनी कक्षाओ को रुचिपूर्ण और आनंदमय बनाने का प्रयास करते रहेंगे।

(एजुकेशन मिरर से फ़ेसबुकएक्स और यूट्यूब के जरिए भी जुड़ सकते हैं। बच्चों की लिखी सामग्री और उनके बनाये चित्र, अपने मौलिक लेख, पसंदीदा विषय पर कक्षा-शिक्षण के अनुभव और विचार साझा कर सकते हैं educationmirrors@gmail.com पर।)

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