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प्राथमिक कक्षाओं में ‘एक शिक्षक – एक कक्षा’ आधारित शिक्षण के फायदे



प्राथमिक शिक्षा में अक्सर यह देखा जाता है कि विषय-वार शिक्षक व्यवस्था के कारण बच्चों के सीखने की निरंतरता और भावनात्मक जुड़ाव बाधित होता है। जबकि नीति दस्तावेजों का सुझाव है कि एक ही शिक्षक जब एक पूरी कक्षा की जिम्मेदारी लेता है, तो बच्चों के साथ एक स्थायी संबंध बनता है, जिससे सीखने के परिणाम अधिक प्रभावी होते हैं।

  1. एक ही आयु-वर्ग के साथ एक शिक्षक क्यों?
  2. भावनात्मक सुरक्षा और संबंध निर्माण

NEP 2020, अनुच्छेद 1.7 कहता है –
“Foundational years में बच्चों को ऐसे वातावरण की ज़रूरत होती है जहाँ वे सुरक्षित और आश्वस्त महसूस करें, और यह केवल लगातार संपर्क में आने वाले शिक्षक से संभव है।”

  1. निरंतर पर्यवेक्षण और अधिगम प्रगति की पहचान

NIPUN भारत मिशन (पृष्ठ 24) कहता है –
शिक्षक को प्रत्येक बच्चे की अधिगम स्थिति का समग्र दृष्टिकोण रखना चाहिए, जो तब ही संभव है जब वही शिक्षक भाषा, गणित एवं पर्यावरण सभी विषयों का शिक्षण करें।”

  1. शिक्षण-अधिगम में एकरूपता और लय

NCF 2023 (Foundational Stage), खंड 3.2 में स्पष्ट रूप से कहा गया है –
“Foundational कक्षाओं में विषयों का कठोर विभाजन नहीं किया जाना चाहिए। एक ही शिक्षक विषयों को आपस में जोड़कर समग्र अधिगम अनुभव दे सकता है।”

  1. ‘एक शिक्षक–एक कक्षा’ मॉडल से लाभ –

1 अधिगम की निरंतरता

2 एकीकृत शिक्षण दृष्टिकोण

3 शिक्षक की जिम्मेदारी और निगरानी में सुधार

प्राथमिक कक्षाओं में एक ही शिक्षक द्वारा पूरे कक्षा को पढ़ाना न केवल व्यवहारिक रूप से सशक्त मॉडल है, बल्कि यह नीति दस्तावेजों द्वारा भी समर्थित है। इससे बच्चों के अधिगम में समग्रता, भावनात्मक जुड़ाव, निरंतर निगरानी और परिणाम की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है। इसलिए, विषयवार शिक्षण के स्थान पर “एक शिक्षक – एक कक्षा” मॉडल को प्राथमिक कक्षाओं में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

(लेखक परिचय: विशाल कश्यप, उत्तर प्रदेश के निपुण भारत मिशन में शैक्षिक संस्था के साथ स्टेट अकादमिक लीड के रूप में कार्यरत हैं। शिक्षा क्षेत्र में इनका 16 वर्षों का अनुभव है। अपने पेशेवर सफ़र के दौरान, उन्होंने कई सरकारों, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ काम किया है और शैक्षणिक एवं प्रबंधन विशेषज्ञता हासिल की है।)

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