यूं तो सफर एक थकान भरा शब्द है, लेकिन किताबों को पढ़ने का सफर बहुत ही उत्साह जनक और आनंदवर्धक होता है। बच्चों को नई-नई किताबें पढ़ते हुए देखना, इस सफर को और भी खूबसूरत बना देता है। किताबों के रंगीन चित्र , नए-नए शब्दों के संसार में गोते लगाना, किताबों की खुशबू और कहानियों की विविधता बच्चों के मन में पढ़ने की ललक को बढ़ाती रहती हैं। यदि बच्चों को किताबें पढ़ने का चस्का लग जाए तो वे खुशी-खुशी पढ़ने के सफर में चल पड़ते हैं।
अपने नए विद्यालय में मैंने पुस्तकालय को जीवंत की कोशिश शुरू कर दी है। बच्चों को प्रतिदिन नई-नई किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं और वे अपने स्तर के अनुसार उन्हें पढ़ते हैं। जो बच्चे पठन से जूझ रहे हैं उनकी अध्यापक पढ़ने में मदद भी करते हैं।
DEAR =Drop Everything And Read
भोजन अवकाश के पूर्व यह बेला रखी गई है जिसमें बच्चे अपनी प्रथम मध्य दिवस तक की पढ़ाई पूर्ण करके किताबों को पढ़ने का सफर जारी करते हैं।
Read Aloud
DEAR बेला में प्रतिदिन एक या दो बच्चों को, अपनी किसी पढ़ी हुई पुस्तक को कक्षा के सामने पढ़ने का अवसर मिलता है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास दृढ़ होता है। प्रतिदिन अलग-अलग बच्चों को अवसर मिलने से उनका उत्साह बना रहता है । शुरुआत में मैंने लगातार कई दिन अलग-अलग किताबों से Read aloud किया। बच्चे अध्यापक की नकल करना चाहते हैं और इसमे उन्हें बहुत अच्छा भी लगता है। कभी-कभी अध्यापक भी किताबों की मॉडल रीडिंग या रीड अलाउड करते हैं।
ओ हरियल पेड़
आज बारी थी एक अनोखी किताब की जिसका नाम है “ओ हरियल पेड़”। इसे एकलव्य ने प्रकाशित किया है जो की एक उड़िया लोक कथा है। इस कहानी के रीड अलाउड के बाद पूरी कक्षा ने मिलकर तय किया कि वे भी अपनी एक नई कहानी बनाएंगे। कहानी के चित्र बनाकर उसे एक किताब के रूप में सजाएंगे।
इसके लिए मैंने कक्षा को दो समूह में बांट दिया और दोनों समूहों को आपस में चर्चा करके एक समस्या सुझाने को कहा। समूह एक की शुरुआत बिल्ली के बच्चों से हुई और आपसी बातचीत द्वारा वह कहानी बढ़ते बढ़ते एक प्यासे सूरज की कहानी बन गई। कहानी बनाने की प्रक्रिया में कई बार कहानी ऐसे अंधे मोड़ पर पहुंचती थी कि जिसे आगे बढ़ना मुश्किल लगता था परंतु फिर सोच समझ कर नए पात्रों के प्रवेश से कहानी नया मोड़ लेती थी।
इस रूप में हमारी कहानी तैयार हुई-
“ कहानी: प्यासा सूरज “
अरे बिल्ली के बच्चों ! क्यों रो रहे हो ?
माँ ने हमे भोजन नहीं दिया.
अरे बिल्ली! तूने बच्चों को भोजन क्यूँ नहीं दिया?
मुझे मालकिन ने खाना नहीं दिया.
अरे मालकिन! तूने बिल्ली को खाना क्यूँ नहीं दिया?
मेरी भैंस ने दूध नहीं दिया.
अरे भैंस! तूने मालकिन को दूध क्यूँ नहीं दिया.
मुझे तालाब पर पानी नहीं मिला.
अरे तालाब! तूने भैंस को पानी क्यूँ नहीं दिया?
मेरा पानी सूरज ने सुखा दिया.
अरे सूरज! तूने तालाब को क्यूँ सुखाया?
क्योंकि मुझे प्यास लगी थी.
किताब का निर्माण की प्रक्रिया
मैंने बच्चों द्वारा मिलकर कहानी को कागज पर लिखा और प्रत्येक स्टेप के चित्र बनाने की जिम्मेदारी टीम के अलग अलग सदस्यों ने ली और कम समय में ही चित्र तैयार हो गए। मैंने पुराने डिब्बों, कार्ड आदि को मिलाकर, इस पूरे काम को एक किताब के रूप में संकलित कर लिया। किताब का नाम सुझाने में भी बच्चों ने काफी मशक्कत की, पर आखिर में हमने इसका नाम ‘प्यासा सूरज’ ही रख लिया।
किताब पढ़ने से लेकर किताब गढ़ने तक का यह सफर अनूठा है। इस सफर का मजा पाने के लिए आपको भी इस सफर पर चलना होगा। इस कहानी का PDF डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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