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लाइब्रेरी का महत्वः समझ के साथ ‘पढ़ने के आनंद’ से परिचित कराती है लाइब्रेरी

  1. पहले पुस्तकालय में किताबें सजाकर रखी रहती थीं, और ताला लगा रहता था। लेकिन अब लाइब्रेरी में पठन गतिविधियां हो रही हैं और बच्चों के साथ किताबों का लेन-देन हो रहा है।
  2. लाइब्रेरी कालांश में होने वाली चर्चा में सभी बच्चे बोल रहे हैं। पहले केवल कुछ ही बच्चों की भागीदारी होती थी। सभी बच्चों को 8-10 किताबों के नाम पता है। हर बच्चा कम से कम 1-2 किताबों के नाम जानता है।
  3. विद्यालय में बच्चे अलग-अलग किताबों पर आधारित कहानी का रोल प्ले भी कर रहे हैं। संवाद करने की उनकी झिझक टूटी है और बच्चों में अपनी बात कहने का आत्मविश्वास आया है।
  4. शिक्षक साथियों को पहले लगता था कि किताबें फट जाएंगी तो जवाब क्या देंगे। लेकिन अब वे किताबों का लेन-देन व पठन गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। जो किताबें कभी बाहर नहीं होती थीं, वे अब इस्तेमाल में आ रही हैं।
  5. किताबों की एक समझ शिक्षक साथियों में विकसित हुई है, उनको पता चल रहा है कि बच्चों को किस तरह की किताबें पसंद हैं। जिन कक्षाओं में शिक्षक नहीं होते हैं, वे बच्चे पुस्तकालय में जाकर किताब पढ़ते हैं। इससे बच्चों में किताबों की विषय सामग्री को लेकर समझ बेहतर हो रही है।
  6. हर कक्षा के लिए टाइम टेबल में एक दिन का समय रखा गया है। इसके साथ ही साथ लाइब्रेरी के काम में बच्चों की भागीदारी शिक्षकों द्वारा ली जाती है। बच्चे लाइब्रेरी को अपने स्पेश के रूप में देखने लगे हैं।
  7. भाषा कालांश में पुस्तकालय की किताबों का उपयोग होता है। इसके साथ ही अलग-अलग तरह की गतिविधि भाषा कालांश में होती है जैसे रोल प्ले, चित्र बनाना, कहानी को पढ़कर सुनाना, कहानी के ऊपर चर्चा करना, बच्चों को कविताएं सुनाना इत्यादि।
  8. कहानी की किताब पढ़ते हुए बच्चे किताब की सामग्री को समझने की कोशिश करते हैं। कुछ कक्षाओं के बच्चे ख़ासतौर पर चौथी-पांचवीं के बच्चे धारा प्रवाह तरीके से किताब पढ़ भी रहे हैं और समझ भी रहे हैं।

जीवंत लाइब्रेरी का क्या असर होता है?

लाइब्रेरी का असर सभी विषयों के पाठ्यक्रम पर पड़ता है। बच्चे भाषा के कालांश में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। उनमें आत्मविश्वास विकसित होता है। लाइब्रेरी के निरंतर इस्तेमाल से बच्चों में देर तक बैठकर पढ़ने का धैर्य और क्षमता विकसित होता है, जो आजीवन मदद करने वाली है।

लाइब्रेरी के संदर्भ में सबसे जरूरी बात है कि हम खुद लाइब्रेरी के महत्व और उसके विचार से सहमत हों। जब हम लाइब्रेरी से खुद सहमत होंगे तभी इस चीज़ को आगे बढ़ा सकेंगे और अन्य शिक्षक साथियों को भी इस मुहिम से जोड़ सकेंगे। अगर हम खुद ही लाइब्रेरी के सक्रिय इस्तेमाल के लिए नहीं तैयार और सहमत हैं तो फिर इसे आगे कैसे लेकर जाएंगे। आखिर में यही कहना है कि लाइब्रेरी किसी भी स्कूल का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इस विचार को क्रियान्वित करने और इसके सकारात्मक फायदों को हर बच्चे तक पहुंचाने की जरूरत है।

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Madangopal Tiwari

बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी जो छात्रों को लाइब्रेरी की ओर उन्मुख करेगी। धन्यवाद

Anonymous

Very nice

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