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जानिए बच्चों के लिए दोस्ती के मायने क्या हैं?



लाली का नया दोस्त कहानी की लेखिका इवोन जागतेनबर्ग हैं।

बच्चों की भावनाओं में विविधता होती है। कुछ भावनाएं रोज-रोज की पुनरावृत्ति के कारण ज्यादा स्पष्ट रूप में दिखाई देती हैं। शेष भावनाओं को अभिव्यक्ति के ज्यादा अवसर न मिलने के कारण शायद वे ज्यादा स्पष्ट रूप में सामने नहीं आतीं, क्योंकि उनके ऊपर चर्चा क्लासरूम में होने वाली चर्चा का विषय नहीं होती। आज हम ‘दोस्ती’ को लेकर बच्चे कैसे सोचते हैं, इसे उन्हीं के शब्दों में समझने की कोशिश करेंगे। इस चर्चा में तीसरी से आठवीं तक के बच्चे शामिल थे।

आप किसे दोस्त किसे मानते हैं?

इस सवाल के जवाब में कुछ जवाब आए जो इस तरह हैं –

  1. मेरे दोस्त तो हैं, लेकिन कोई ख़ास दोस्त नहीं है।
  2. दोस्त वो है जो मुझसे बातें करता हो।
  3. दोस्त वो है जो अपनी बातें हमें बताए और मेरी सुन ले।
  4. दोस्त हमें ग़लत राह पर नहीं चलने देता।
  5. नशा, चोरी और झूठ से बचाता है।

आप किससे दोस्ती करते हैं?

  1. जो इंसान अच्छा हो
  2. जो भलाई चाहता हो
  3. जो साथ देता हो
  4. हर कदम पर साथ चले
  5. परछाईं बनकर चले
  6. जिसका मन साफ हो
  7. जिसका मन सुंदर हो

किसी के ‘मन साफ होने’ का पता कैसे चलेगा? इस पर एक बच्चे ने जवाब दिया कि दोस्ती पक्की हो तो मन भी देख सकते हैं।

इस चर्चा में पता चली कि एक ही क्लासरूम में बैठने वाले बच्चों के बीच भी बहुत कम बात होती है। खासतौर पर उनको एक-दूसरे के परिवार, परेशानियों और खुशी के बारे में भावनाओं के बारे में कम अंदाजा होता है। जब क्लासरूम में दोस्त की बात हुई तो बच्चों के अधिकतम 4-5 लोगों के नाम लिए। कुछ बच्चों ने एक-दो दोस्तों का जिक्र किया जिनके साथ ने नियमित रूप से बैठते हैं। ऐसे भी जवाब आए कि उनका कोई ऐसा दोस्त नहीं है,जो उनकी बातें सुनता और उनको समझता हो।

इस बात ने बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक विकास पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित किया। बच्चों के सीखने के दायरे में दोस्ती करना सीखना भी शामिल होना चाहिए।

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