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परीक्षाओं से डर तो लगता है?

शिक्षा जीवन भर चलती रहती है।

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परीक्षाओं से कौन डरता है? इस सवाल के जवाब में आमतौर पर स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों का जिक्र होगा। मगर परीक्षाओं के परिणाम से अभिभावक भी डरते हैं और शिक्षक भी।

शिक्षक कैसे डरते हैं? इसके लिए एक-दो उदाहरण लिए जा सकते हैं।

हाल ही में एक राज्य के मुख्यमंत्री ने कहा जिन स्कूलों के अच्छे परिणाम नहीं होंगे, वहां पढ़ाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जाहिर है कि इस कार्रवाई से शिक्षकों के मन में थोड़ा डर तो पैदा होगा ही। चाहें वह वेतन वृद्धि रुकने का डर हो। या फिर ट्रांसफर का।

इसी तरीके से एक राज्य में यह भी चर्चा है कि अगर आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में किसी स्कूल के बच्चों का परिणाम 40 फीसदी से कम रहता है तो शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोक ली जाएगी। इस तरह की बातों से शिक्षक डरते ही हैं। मगर क्या इस डर का शिक्षकों के काम पर। बच्चों को पढ़ाने के मोटीवेशन पर कुछ असर होगा। कहना मुश्किल है।

मगर परीक्षा से डरने वालों का दायरा दिनों-दिन बड़ा हो रहा है। एक बात तो साफ-साफ समझ में आती है।

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