दर्शनशास्त्र का जगत
वे कहते हैं, “दर्शनशास्त्र के जगत में, कोई भी विचार पुराना नहीं पड़ता। न ही वह उसी स्थिति में बना रहता है जहाँ शुरू में था – इन दोनों बातों को दिमाग में रखना बहुत जरूरी है। भले ही कोई कोई 2500 वर्ष पुराना विचार हो, भले ही गौतम बुद्ध का कोई विचार हो, या कोई ऐसा विचार जो समाज में अभी-अभी आया हो – वह विचार कभी पुराना नहीं पड़ता, भले ही एक नहीं सैकड़ों पीढ़ियां उसे आजमा चुकी हों। और भले ही उन्होंने यह राय दी हो कि हम आजमाकर देख चुके और इसमें कुछ सार नहीं है। इसके बाद भी, उस विचार में एक चमक बनी रहती है।”
इसके आगे की पंक्तियां हैं, “दूसरी तरफ, कोई भी विचार वह नहीं रह जाता जो वह पहली बार प्रस्तावित किए जाते वक्त था, क्योंकि बीच के समय में वह विचार अन्य कई विचारों में जीता है। किसी विचार की, उसकी उत्पत्ति से आगे जाने की क्षमता का अनुभव उस विचार को निरन्तर पूरे परिदृश्य में फिर से स्थापित कर देता है।”
(प्रोफेसर कृष्ण कुमार एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक रह चुके हैं। वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षा विभाग में पढ़ा रहे हैं। एनसीएफ-2005 के बनने का कार्य उनके नेतृत्व में संपन्न हुआ।)
