160 रूपए में शिक्षक बच्चों को अच्छी ड्रेस कैसे उपलब्ध करवाएं? इस तरह की कई समस्यों से वहां शिक्षक जूझ रहे हैं। लेकिन कमीशन के कारोबार में हर कोई अपना हिस्सा चाहता है, बच्चों की पढ़ाई जैसे भी हो। उससे उन लोगों को कोई मतलब नहीं है, जिनके कंधों पर हालात तो बेहतर बनाने का दारोमदार है।
वहां के एक शिक्षक कहते हैं, “हम काम करना चाहते हैं। बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं। लेकिन पढ़ाई के अतिरिक्त काम का बोझ दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। छोटे बच्चों को आप एक घंटे के लिए छोड़ नहीं सकते और कागजी काम इतने होते हैं कि बिना एक घंटा अकेले बैठे उनको पूरा करना मुश्किल है। इसके अलावा बाकी जिम्मेदारियां भी तो होती हैंं।”
