उत्तर प्रदेश के स्कूलों में ‘कमीशन’ की कहानी क्या है?

education-mirrorउत्तर प्रदेश के प्रायमरी स्कूलों में पहली कक्षा के बच्चों के लिए ड्रेस के लिए 200 रूपए दिये जाते हैं। आठवीं कक्षा के बच्चों के ड्रेस के लिए भी 200 रूपए दिये जाते हैं। इसमें से अधिकारियों का 20 फ़ीसदी कमीशन पहले से निश्चित है। यानी 200 रूपए में से 40 तो अधिकारियों के हिस्से चले जाते हैं।

160 रूपए में शिक्षक बच्चों को अच्छी ड्रेस कैसे उपलब्ध करवाएं? इस तरह की कई समस्यों से वहां शिक्षक जूझ रहे हैं। लेकिन कमीशन के कारोबार में हर कोई अपना हिस्सा चाहता है, बच्चों की पढ़ाई जैसे भी हो। उससे उन लोगों को कोई मतलब नहीं है, जिनके कंधों पर हालात तो बेहतर बनाने का दारोमदार है।

वहां के एक शिक्षक कहते हैं, “हम काम करना चाहते हैं। बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं। लेकिन पढ़ाई के अतिरिक्त काम का बोझ दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। छोटे बच्चों को आप एक घंटे के लिए छोड़ नहीं सकते और कागजी काम इतने होते हैं कि बिना एक घंटा अकेले बैठे उनको पूरा करना मुश्किल है। इसके अलावा बाकी जिम्मेदारियां भी तो होती हैंं।”

इस लेख के बारे में अपनी टिप्पणी लिखें

%d bloggers like this: