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देखिए ‘प्राथमिक विद्यालय बदलपुर’ में बदलाव की कहानी



‘पढ़े भारत बढ़े भारत’ केंद्र सरकार की एक योजना है। इसके तहत स्कूलों में सालभर में 200 दिन की पढ़ाई अनिवार्य है।

उत्तर प्रदेश के बहुत से सरकारी स्कूलों में विद्यालय के भौतिक वातावरण के साथ-साथ शैक्षिक माहौल को बेहतर बनाने के प्रयास हो रहे हैं। इन प्रयासों की बानगी आप इन तस्वीरों में भी देख सकते हैं।

 

अच्छे माहौल में बेहतर पढ़ाई पर दिया जा रहा है ध्यान

बलरामपुर ज़िले के प्राथमिक विद्यालय बदलपुर में कक्षा की दीवारों को सहायक शैक्षिक सामग्री के रूप में सजाया गया है।

रंगों की पहचान कैसे कराएं?

अगर कक्षा के भीतर का माहौल जीवंत हो तो बच्चों का पढ़ाई में मन लगता है। ऐसे माहौल में शिक्षक ख़ुद भी अच्छा महसूस करते हैं।

इस तस्वीर के शरीर के विभिन्न अंगों की तस्वीरों को दीवारों पर चित्रित किया गया है। इसके साथ ही रंगों के नाम हिंदी व अंग्रेजी में लिखे गये हैं ताकि इसकी मदद से शिक्षक बच्चों को इनसे परिचित करवा सकें।

यह तस्वीरें बलरामपुर ज़िले के प्राथमिक विद्यालय बदलपुर में बदलाव की एक झलक पेश करती हैं।

 

क्या है ‘पढ़े भारत, बढ़े भारत’ योजना?

एक रिपोर्ट के मुताबिक़, “‘पढ़े भारत बढ़े भारत’ योजना के तहत स्कूलों में सालभर में 200 दिन की पढ़ाई अनिवार्य होगी।”

इस योजना के अनुसार, “स्कूलों से 500 घंटे भाषा सीखने तथा 300 घंटे प्रारंभिक गणित सीखने पर खर्च होंगे। स्कूलों में शिक्षकों की 95 प्रतिशत उपस्थिति होगी तथा छात्रों को स्कूलों में 75 प्रतिशत उपस्थिति रखनी होगी। ”

प्रारंभिक साक्षरता और प्रारंभिक गणित के शिक्षण से जुड़ी सामग्री को भी दीवारों पर चित्रित किया गया है।

उत्तर प्रदेश के स्कूलों में बदलाव की ऐसी तस्वीरों की बानगी समय-समय पर विभिन्न तस्वीरों में मिलती रहती है। एत तस्वीर परीक्षा की भी देख सकते हैं, जिसमें प्राथमिक स्तर के विद्यार्थी छमाही परीक्षाओं में हिस्सा ले रहे हैं। नीचे वाली तस्वीर बदलपुर के अलावा किसी अन्य विद्यालय की है, उत्तर प्रदेश में होने वाले शैक्षिक बदलाव को ऐसी तस्वीरें रेखांकित करती हैं।

उत्तर प्रदेश के एक परिषदीय विद्यालय में परीक्षा देते विद्यार्थी।

आप भी एजुकेशन मिरर के साथ अपने विद्यालयों में होने वाले नवाचार, शैक्षणिक विधियों में सुधार, बच्चों के पढ़ना-लिखना सीखने की कहानी, विद्यालय स्तर पर होने वाले बदलाव, शिक्षकों के प्रयासों को बताने वाली छोटी-छोटी घटनाएं शेयर करते हैं। ऐसे प्रयासों से हम शिक्षा के क्षेत्र की सकारात्मक ऊर्जा को अच्छे बदलाव को सहयोग देने में लगा सकते हैं।

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