मारिया मान्टेसरी एक छोटी बच्ची के साथ। तस्वीरः साभार बीबीसी
मारिया मान्टेसरी एक इटैलियन भौतिकविज्ञानी और शिक्षाविद थीं। शिक्षा दर्शन के क्षेत्र में उन्होंने बेहद उल्लेखनीय काम किया और उनके विचारों को उनके नाम से ही पूरी दुनिया में प्रसिद्धि हासिल हुई। उन्होंने कहा, “हर बच्चे में स्वयं सीखने की क्षमता होती है। इसे प्रमाणित करने के लिए केवल एक उदाहरण ही काफी है। एक छोटा बच्चा खुद से अपने माता-पिता की भाषा सीख लेता है, लेकिन वयस्कों के लिए नई भाषा सीखना बहुत बड़ी बौद्धिक उपलब्धि की बात मानी जाती है। छोटे बच्चे को कोई भी भाषा का व्याकरण नहीं सिखाता है, लेकिन बच्चा बहुत शीघ्रता के साथ संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया व विशेषण इत्यादि का इस्तेमाल या प्रयोग करना सीख लेता है।”
बच्चों के सीखने की क्षमता पर भरोसा क्यों जरूरी है?
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लेकिन उपरोक्त बात का यह आशय भी नहीं निकाल लेना चाहिए कि बच्चों को बड़े के निर्देशन या सहयोग की जरूरत नहीं है। या फिर बच्चे तो बग़ैर किसी शिक्षक के भी सीख लेंगे। शिक्षक को कोई प्रयास करने की जरूरत नहीं है। शिक्षक की भूमिका को आधुनिक संदर्भों में एक सुगमकर्ता के रूप में देखा जाता है, जो बच्चों को खुद से सोचने के लिए और समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करके सीखने के लिए प्रेरित करता है। इसके लिए लेक्चर और रटाने वाली विधियों के अलावा अन्य व्यावहारिक रणनीतियों पर अमल की कोशिश हो रही है क्योंकि समय के साथ इस विचार को बल मिला है कि बच्चों के सीखने का तरीका अलग-अलग होता है। इसलिए बच्चों को विविध तरीके से सीखने व आगे बढ़ने का अवसर क्लासरूम में मिलना चाहिए।
