सुनिए कविताः शिशु लोरी के शब्द नहीं संगीत समझता है
स्कूल से लेकर कॉलेज और विश्वविद्यालय तक की पढ़ाई में बार-बार कविता के अर्थ की तरफ जोर दिया जाता है। लेकिन नरेश सक्सेना जी ने कहा कि अर्थ पहले आता है फिर कविता का सृजन होता है। पहले अर्थ आने वाली बात बिल्कुल नई सी लगी, क्योंकि आमतौर पर शिक्षण प्रक्रिया में शब्द और अर्थ रटवाने की परंपरा इसके ठीक विपरीत दिशा में चलती है। यहां तक कि बच्चों को अपने घर की भाषा में बोलने से भी रोका-टोका जाता है, इस नजरिये से इस कविता पर होने वाली चर्चा एक सार्थक विमर्श की तरफ बढ़ी। नरेश जी ने कई अन्य कविताएं भी सुनाईं और अपने लेखन के अनुभवों को साझा किया।
