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बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

कविता में अर्थ पहले आता हैः नरेश सक्सेना

नरेश सक्सेना जी कहते हैं कि कविता में अर्थ पहले आता है और फिर कवि उसे शब्दों में प्रकट करता है।

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वरिष्ठ कवि और लेखक नरेश सक्सेना कहते हैं कि अगर किसी कविता को पढ़ते समय अपने शब्दों पर आत्मविश्वास नहीं होगा तो वह भाव नहीं आयेगा। हम जीवित शब्द बोलते हैं। शब्द पर विश्वास, सुनने वाले को भी यकीन करने का आश्वासन देती है। भाषा हमने बोलकर प्राप्त की है, लिखकर प्राप्त नहीं की है। भाषा हमारे पास ध्वनियों के माध्यम से आती है। उन्होंने एक कविता सुनाई, “शिशु लोरी के शब्द नहीं, संगीत समझता है। बाद में समझेगा भाषा, अभी वह अर्थ समझता है।“ इस कविता के माध्यम से उन्होंने अपने अनुभव साझा किये कि हमारे पास अर्थ पहले आते हैं। उसके बाद हम भाषा के माध्यम से उसे व्यक्त करते हैं।

सुनिए कविताः शिशु लोरी के शब्द नहीं संगीत समझता है

स्कूल से लेकर कॉलेज और विश्वविद्यालय तक की पढ़ाई में बार-बार कविता के अर्थ की तरफ जोर दिया जाता है। लेकिन नरेश सक्सेना जी ने कहा कि अर्थ पहले आता है फिर कविता का सृजन होता है। पहले अर्थ आने वाली बात बिल्कुल नई सी लगी, क्योंकि आमतौर पर शिक्षण प्रक्रिया में शब्द और अर्थ रटवाने की परंपरा इसके ठीक विपरीत दिशा में चलती है। यहां तक कि बच्चों को अपने घर की भाषा में बोलने से भी रोका-टोका जाता है, इस नजरिये से इस कविता पर होने वाली चर्चा एक सार्थक विमर्श की तरफ बढ़ी। नरेश जी ने कई अन्य कविताएं भी सुनाईं और अपने लेखन के अनुभवों को साझा किया।

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