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मरियल भूत की कहानी

पठन कौशल, पढ़ने की आदत, रीडिंग स्किल, रीडिंग हैबिट, रीडिंग रिसर्च,

एक सरकारी स्कूल में एनसीईआरटी की रीडिंग सेल द्वारा छापी गयी किताबें पढ़ते बच्चे।

किसी कहानी के पात्रों के साथ जब बच्चे खुद को जोड़ पाते हैं। अपने मन में घटनाओं की तस्वीर बनाते हैं। यह लम्हा सबसे खूबसूरत होता है क्योंकि बच्चे हँसते हैं। वे हैरान होते हैं। सहज जिज्ञासा के साथ अगले लम्हे का इंतज़ार करते हैं। वे उस किताब में बने चित्रों को देखना चाहते हैं। उस किताब को खुद हाथ में लेकर देखना और पढ़ना चाहते हैं।

बच्चों में पढ़ने की आदत का विकास ऐसे ही होता है। किसी एक किताब को पढ़ने से मिलने वाला आनंद दूसरी किताब के लिए ललचाता है। फिर यह लोभ तीसरी और चौथी किताबों के लिए होता है। इस तरीके से किताबों के साथ कभी न टूटने वाला रिश्ता बन जाता है और ढेर सारी किताबों के साथ पढ़ने का यह सिलसिला रोज़मर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन जाता है।

पढ़ने की आदत के बारे में एक ख़ास बात है कि हम ज्यों-ज्यों किताबें पढ़ते जाते हैं। हमारे पठन कौशल का विकास भी साथ-साथ होता रहता है। हमारे पढ़ने की रफ्तार, चीज़ों को समझने की हमारी क्षमता में बढ़ोत्तरी हो रही होती है।

मरियल भूत की कहानी

आज बच्चों को एक कहानी सुनाई। कहानी का नाम था ‘मरियल भूत’। यह कहानी इंद्रजीत सिंह ने लिखी है। इस कहानी में दृश्यों के संवाद इतने जीवंत हैं कि सबकुछ आँखों के सामने दिखाई देता है। मरियल भूत की बड़ी छाया के साथ शुरू होने वाली कहानी धीरे-धीरे बच्चों को घटनाओं के क्रम और आवाज़ों के विशेष जादू से मोह लेती है।

इस कहानी में हर चीज़ के खाने की आवाज़ों का बड़ा सुंदर इस्तेमाल किया गया है। इस कहानी में किसी सुनी हुई ‘अच्छी बात’ को अमल में लाने के फायदे के बारे में बताया गया है कि कैसे सब्जी, सलाद और दूध पीकर एक मरियल भूत ताकतवर हो जाता है। रोचक बात है कि जिस मां-बेटी के संवाद से ‘मरियल भूत’ कहानी का प्रस्थान होता है, वे बस भूत-भूत चिल्लाकर रह जाते हैं। भूत हवा में उड़ जाता है।

आप भी लिख सकते हैं कहानी

बेटी खाने वाली सलाह को अमल में लाती है या नहीं। इसका पता कहानी में नहीं चलता। खाने की चीज़ों के प्रति भूत का लगाव। चीज़ों का हवा में उड़ना और गायब हो जाना, यह सारी बातें एक तिलिस्म सा रचती हैं। इस कहानी पर बच्चों से चर्चा हो रही थी कि किसी ने भूत देखा है क्या? बच्चों का जवाब था नहीं।

फिर उनमें से एक ने कहा, “इस गाँव में भूत रहता है। वह रात को निकलता है 12 बजे।” बहुत सी धारणाएं बच्चों के मन में थीं भूत को लेकर, वे उसके बारे में चर्चा कर रहे थे। हमने इस बातचीत को इस बिंदु पर लाकर रोका कि यह एक कहानी है। इसी तरह की कोई कहानी आप भी लिख सकते हैं। कहानी हमारे मन की कल्पना की उपज होती है। बतौर लेखक हम जो बात कहना चाहें उसके माध्यम से कह सकते हैं।

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