अब तक आरव ने कुल छह कविताएं लिखी है , जिसमे हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं की कविताएं शामिल है। कविताएं लिखने में आरव को बहुत मज़ा आता है। आरव की डायरी में सिर्फ वर्णन ही नहीं है बल्कि कविताएं भी डायरी का एक अहम् हिस्सा हैं। फिल्में देखने का आरव को बचपन से ही काफी शौक है , इस कविता में आरव ने जो फिल्म देखि है उसकी एक ख़ास बात लिखी है, जैसे कहा जाता है की कविताएं अपनी बात कम शब्दों में कहने का सशक्त माध्यम होती हैं. इस कविता को आप पढ़िए और आनंद लीजिए।
लॉयन किंग में होता है एक सिम्बा नाम का बच्चा शेर
उसपे जब आया हायना का खतरा
तब उसके पापा मुफासाने उसे बचाने की करी नहीं देर
ऐसी हैं फिल्में जो मैंने देखी है
अन्य कविताएं
एँड़ी के पास थे
खिलौने बहुत सारे
पर सीड था
जो उन खिलौनो को बहुत मारे
ऐसी है फिल्मे जो मैंने देखी है
दंगल में होती है कुस्ती करने वाली लड़कियां दो
पर सुलतान में होता है सलमान खान बॉक्सिंग करता है जो
ऐसी है फिल्में जो मैंने देखी हैं
गाज़ी अटॅक में थी भारत पाकिस्तान की लड़ाई
उस फिल्म में पाकिस्तान ज्यादा मारता है बड़ाई
ऐसी है फिल्मे जो मैंने देखी हैं
वॉल इ में थे दो रोबोट
एक था नया जिसका नाम था ईवी
एक था पुराना जिसका नाम था वॉल इ
टारज़न द वंडर कार में एक थी जादुई कार
जो चलती थी दिन रात अपने दुश्मनो को मारने बार – बार
ऐसी है फिल्में जो मैंने देखी हैं
(डायरी के यह पन्ने इस मायने में बेहद ख़ास हैं क्योंकि इसे चौथी कक्षा में पढ़ने वाले आरव गजेंद्र राउत ने लिखा है। वे एजुकेशन मिरर के सबसे नन्हे लेखक हैं। उनकी दो डायरी जब प्रकाशित हुई थीं, तब वे दूसरी कक्षा में ही पढ़ रहे थे। अभी हिन्दी से मराठी भाषा में लेखन का नयापन महसूस करिए आरव की डायरी में।)
