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आप सभी को हैप्पी मदर्स डे, उनको भी जो अपनी माँ से दूर घर लौटने के सफ़र में हैं!


आप सभी को ‘मदर्स डे’ की शुभकामनाएं! माँ के प्यार और स्नेह की जगह दुनिया की कोई कीमती से कीमती चीज भी नहीं ले सकती। ये वो रिश्ता है जिसमें माँ हर पल हमें अपने आशीर्वाद से सलामत रहने की दुआ देती है। इस अवसर पर नन्हें मुन्ने बच्चों की माँ को भी याद रखना जरूरी है। यह दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

शिक्षक भास्कर जोशी लिखते हैं कि इस संकट काल मे कुछ सुखद अनुभव भी मिल रहे हैं। अब देखिए ना हाल में कितने समाचार आए हैं कि सहारनपुर से, चंडीगढ़ से और इलाकों से हिमालय से श्रृंखला दिखाई दे रही है अर्थात वायु प्रदूषण कम हो रहा है। ऐसा दावा किया गया कि गंगा का पानी इतना शुद्ध हो गया है इसका जल कोरोना के इलाज के लिए किया जा सकता है, अर्थात जल प्रदूषण न्यून हो रहा है।

मनुष्य की दैनिक दिनचर्या पर नियंत्रण है। अतः उनके द्वारा फैलाए जाने वाला कचरा भी मन हो रहा है। तो इस स्तर से असली प्रदूषण भी न्यून हो रहा है। जंगलों का दायरा इतना बढ़ गया है कि जंगल अब शहर पहुंच गया है, यहां-वहां सड़कें सुनसान है। परंतु जानवरों की आवा-जाही निरंतर दिख रही है। लोग घर पर रहकर व्यस्तता के कारण धूमिल हो चुके रिश्तों को भी सुधार रहे हैं।

पिछले कई सालों में पहली बार घर पर माँ के साथ हूँ

मेरा भी यही अनुभव रहा है पिछले 14 वर्षों से लगातार घर से दूर रहता था पर अपने विद्यार्थियों के साथ इस दिवस को बहुत हर्षोल्लास के साथ बनाता था सभी माताओं बहनों को विद्यालय में बुलाकर उनके साथ विशेष भोज व उनका सम्मान किया जाता था बच्चों से कहता था कि अपनी मम्मी के लिए कार्ड बनाएं फूलों के गुलदस्ते बनाएं और उन्हें सम्मानित करें। आज करोना काल के कारण मैं अपने विद्यालय से और छात्रों से तो दूर हूं पर शैक्षिक और रचनात्मक कार्य निरंतर अपनी प्रगति पर है मैं यह भी दावा नहीं करता।

इस व्हाट्सएप ऑनलाइन कक्षा के माध्यम से इस कोरोना काल में बच्चों को अकेलेपन, अवसाद से बचाने के लिए व उनसे लगातार संवाद बनाने में यह बहुत सहायक सिद्ध हो रहे हैं। बच्चे भी पूरी तरह से गतिशील है। वे आज भी इस दिवस को नहीं भूले। कल सेवित क्षेत्र से खुशी का फोन आया और उसने याद दिलाया – “सर क्या हम कल कार्ड बनाएंगे” मैंने कहा अवश्य- सभी बच्चों से कहो कि अपनी मां के लिए कार्ड बनाएं और गुलदस्ता बनाकर सम्मानित करें।

आज मैं अपनी मां के पास हूं यह अनुभव इस दुखद काल में एक सुखद अनुभव देता है। दुखद इसलिए कि ना जाने कितने लोग अपनी मां से इस वक्त बिछड़े हुए हैं घर आना के लिए लालायित हैं। कई लोग घर आने के लिए चले लेकिन बेहद दर्दनान मौत के मुँह में समा गये। सुखद मेरे लिए इसलिए क्योंकि आज मैं अपनी मां के पास हूं पिछले दो महीने से मैं वह सब कर पाया हूं जो मैं पिछले 14 वर्षों तक नहीं कर पाया, अगर माँ पास है तो जहान है।

मदर्स डे पर लिखी एक कविता

दूर हूँ तुमसे बहुत ओ माँ
आशीष की तेरे पर छाँव तो है
कैसे कहूँ मैं हूँ अकेली
माँ सी मुझमें एक माँ तो है।

तेरी शिक्षा, तेरी मेहनत
ये सब कुछ मेरे साथ तो है
याद आये जब तो सोचूं यही
माँ सी मुझमें एक माँ तो है।

तेरा जीवन, मेरा दर्पण
उलझूं जब भी, झाँकू उसमें
जब पाना चाहूँ मैं संग तेरा
माँ सी मुझमें एक माँ तो है।

उम्र का दरिया बहते-बहते
दूर तलक ले आया है
पर मुझमें बाकी है वही बचपन
माँ सी मुझमें एक माँ तो है।

तेरे तन की मीठी खुशबु सी
मैं महक रही हूँ इस जग में
तेरा नूर ही मुझ पे बरस रहा
माँ सी मुझमें एक माँ तो है।
“दिल से नमन माँ”🙏🏻🙏🏻🌹

रीता गुप्ता, सहारनपुर

‘मदर्स डे’ का मौका अपनी माँ को याद करने का और उनकी परवाह, प्यार और स्नेह के लिए आभार व्यक्त करने का दिन है। माँ की परवाह और ममता की छाँव की दरकार हर किसी को होती है। माँ के प्रति सम्मान और परवाह हमारी तरफ से भी बना रहे हैं, यही सच्चे अर्थों में असली हैप्पी मदर्स डे होगा। आखिर में पढ़िए आलोक जी की लिखी एक कविता –

हम बच्चों की नाक पोंछती

आँचल माँ का है कमाल जी
करता रहता है धमाल जी।
माँ उसमें है हाथ पोंछती
हम बच्चों की नाक पोंछती।
गरमी में पंखा बन जाता
धूप में छतरी बन तन जाता।
गाँठ लगी जो कोने उसके
बंधते पैसा, टाॅफी छिपके।
जब हम रोते या जिद करते
उससे निकल हमें ही मिलते।
बना रहे हम पर यह साया
मिले हमें जीवन भर छाया।
हम सब बच्चे हैं निहाल जी
आँचल माँ का है कमाल जी।

– आलोक कुमार मिश्रा
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