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68वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

इस साल हम 68वां गणतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इस मौके पर एजुकेशन मिरर की तरफ से आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं। हैप्पी रिपब्लिक डे। संविधान के लागू होने का यह अवसर हमारे लिए ख़ुशी का अवसर है। साथ ही अधूरे लक्ष्यों की दिशा में क़दम बढ़ाने और ध्यान देने का अवसर भी है। पिछले कुछ सालों में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर बच्चों का नामांकन बढ़ा है। ज्यादा बच्चों तक शिक्षा की पहुंच बनी है।

मगर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जीवन कौशलों के विकास की मजबूत बुनियाद बनाने की दिशा में अभी भी बहुत से प्रयासों की दरकार है। इस दिशा में बहुत से साथी देश के विभिन्न हिस्सों में अर्ली लिट्रेसी, गणित, जीवन कौशल, सामुदायिक सहभागिता, प्रधानाध्यापक नेतृत्व विकास, शिक्षकों में नेतृत्व कौशल के विकास के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों को साथ-साथ लेकर चलने वाले सराहनीय प्रयास भी शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे हैं, जिनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय प्रयास

  • स्कूलों में नामांकन बढ़ा है
  • गुणवत्ता वाली शिक्षा पर फोकस बढ़ा है
  • माध्यमिक शिक्षा में सुधार पर फोकस किया जा रहा है
  • अर्ली लिट्रेसी और गणित पर काफी अच्छा काम हो रहा है
  • प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा को एक साथ लाकर नए मॉडल का प्रयोग हो रहा है
  • बालवाड़ी के ऊपर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि बच्चे स्कूल के लिए तैयार हो पाएं
  • शिक्षा का अधिकार क़ानून को लागू करने का प्रयास हो रहा है
  • सेवा-पूर्व प्रशिक्षण को दो साल का समय देकर सुधारने की कोशिश हो रही है
  • बीएड व एसटीसी के छात्रों को स्कूल में काम करने और चीज़ों को समझने का अवसर मिल रहा है
  • शिक्षा में तकनीकी के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जा रहा है, 12वीं तक के स्कूलों में कंप्यूटर के जरिए दूरस्थ शिक्षा से लेक्चर के माध्यम से भी पढ़ाई हो रही है
  • आदिवासी अंचल में विभिन्न संस्थाओं की तरफ से शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के सुंदर प्रयास हो रहे हैं। बहुभाषिकता को एक मूल्य की तरह स्थापित करने का प्रयास हो रहा है ताकि बच्चे स्कूल में अपनी भाषा के कारण उपेक्षित न महसूस करें।

जब इतना कुछ हो रहा है तो जश्न मना सकते हैं। पर बहुत से प्रयास अभी भी कार्य प्रगति पर है वाले मोड में हैं, जिसे आगे बढ़ाना है। आगे लेकर जाना है।

विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र

हमारे देश के राष्ट्रपति महामहिम प्रणब मुखर्जी ने देश के नाम संवोधन में कहा, “15 अगस्तस 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ, हमारे पास अपना कोई शासन दस्तावेज़ नहीं था। हमने 26 जनवरी, 1950 तक प्रतीक्षा की, जब भारतीय जनता ने इसके सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रतता, समानता तथा लैंगिक और आर्थिक समानता के लिए स्वयं को एक संविधान सौंपा। हमने भाईचारे, व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एक और अखण्डता को प्रोत्साहित करने का वचन दिया। उस दिन हम विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बन गए।”

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राजस्थान के सरकारी स्कूल में गणतंत्र दिवस की तैयारी करते बच्चे।

राष्ट्रपति महोदय ने नवाचार को समावेशी बनाने की बात भी कही। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा और तकनीक को जोड़ने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा, “हमारी शिक्षा प्रणाली को, हमारे युवाओं को जीवनपर्यंत सीखने के लिए नवाचार से जोड़ना होगा। आज के युवा आशा और आकांक्षाओं से भरे हुए हैं। वे जीवन के उन लक्ष्यों को लगन के साथ हासिल करते हैं, जिनके बारे में वे समझते हैं कि वे उनके लिए प्रसिद्धि, सफलता और प्रसन्नता लेकर आएंगे। वे प्रसन्नता को अपना अस्तित्वपरक उद्देश्य मानते हैं जो स्वाभाविक भी है।”

एक बार फिर से आप सभी को गणतंत्र दिवस की अनंत शुभकामनाएं। शिक्षा पर संवाद और विमर्श का सिलसिला यों ही जारी रहेगा।

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