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क्या आपकी कक्षा में बच्चे पढ़ते समय शब्दों के अर्थ पूछते हैं?


भाषा शिक्षण के अनुभवों में कालांश में ऐसी स्थिति का आना संकेत करता है कि बच्चे इस बात से अवगत है कि हर शब्द का एक ख़ास अर्थ होता है। उस अर्थ को जानकार पढ़ी जाने वाली सामग्री को ज्यादा बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

बहुत से शिक्षक कहानी या पाठ पर काम करने के दौरान विद्यार्थियों के कुछ शब्दों के अर्थ बताते हैं और वाक्य में उनका व्यावहारिक प्रयोग करके भी बताते हैं। इसके बाद बच्चों को भी शब्दों का इस्तेमाल किसी वाक्य में करने के लिए देते हैं। इस तरह के अभ्यास से बच्चे किसी शब्द को लेकर वाक्य बनाना तो सीखते ही हैं। वे भाषा में शब्दों के इस्तेमाल को लेकर सतर्क भी होते ैहैं।

शब्द भण्डार का महत्व

पढ़ने का आशय है कि हम लिखी हुई सामग्री के आधार पर कही जाने वाली बात को समझ पाएं। क्या हमारी कक्षा में बच्चे किताब, कहानी या कोई कविता पढ़ते हुए उसके अर्थ को जानने के प्रति जिज्ञासु हैं। अगर हाँ तो यह एक अच्छा संकेत हैं। अगर नहीं तो इस दिशा में सायास प्रयास करने की जरूरत है ताकि बच्चों को लिखे हुए शब्दों के अर्थों के बारे में सोचने की दिशा में प्रेरित किया जा सके। शब्द भण्डार (शब्द भण्डार का विकास कैसे होता है?) ऐसे शब्दों का संग्रह हैं, जिनका अर्थ हम जानते हैं। समझ के साथ उनका संदर्भ विशेष में इस्तेमाल करते हैं।

पढ़ना, अर्थ निर्माण की एक प्रक्रिया है। समझ के साथ पढ़ना इस प्रक्रिया को सार्थकता प्रदान करता है। पर उपरोक्त संदर्भ में ध्यान रखने की जरूरत है कि पढ़ना सीखने की प्रक्रिया रोचक और आनंददायी हो। बच्चों को भाषा शिक्षण की प्रक्रिया में खेल सरीखा आनंद आना चाहिए। उनको लगना चाहिए कि वे कोई खेल रहे हैं जो मनोरंजक है। चुनौतीपूर्ण भी और रोचक भी। बच्चों के सामने अपने पठन स्तर से ऊपर की सामग्री पढ़ने का चैलेंज भी रखना चाहिए ताकि बच्चों को अपने पठन स्तर का इस्तेमाल करके ऊंचे स्तर पर पहुंचने की प्रेरणा मिल सके।

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