Site icon एजुकेशन मिरर

भाषा शिक्षण: कैसे करें कहानी पर चर्चा?



कहानी का शीर्षक – टपका का डर ( पाठ – 05 )

बरसात का दिन था । चारों ओर पानी बरस रहा था । दादी माँ का घर भीग रहा था । जल्दी ही छप्पर से पानी टपकने लगा। दादी माँ परेशान हो उठीं , परंतु करती भी क्या? छप्पर पुराना था। थोड़ी देर में ओले भी पड़ने लगे । बेर के बराबर ओले ! उधर एक बाघ ओलों की मार से परेशान हो उठा । कूदते फाँदते वह दादी माँ के घर के पास पहुंचा। दादी माँ अंदर भात बना रही थीं। चूल्हे पर पानी टपक रहा था टप-टप, टप-टप व। वह झुँझला उठी और बोलीं – मुझे टपका से जितना डर लगता है ,उतना तो बाघ से भी नहीं । “बाघ ने सोचा – यह मुझसे तो नहीं डरतीं, मगर टपका से डरती हैं तब टपका जरूर मुझसे भी बड़ा कोई जानवर होगा! बस, यह सोचते ही बाघ घबराया और सिर पर पैर रखकर भागा।

कहानी पर चर्चा के लिए सवाल कैसे बनाएं?

इस सवाल का आसान सा जवाब होगा कि कहानी के लिए ऐसे सवाल बनाएं जो बच्चों को कहानी सुनने के लिए तैयार कर सकें। कहानी के साथ जुड़कर उसे सुनने का आनंद दें और कहानी पूरी होने के बाद कहानी के साथ ठहरने की गुंजाइश बना सकें। उदाहरण के तौर पर इस कहानी पर होने वाली चर्चा के लिए सवाल बनाने के लिए आप कहानी को तीन हिस्सों में बाँट सकते हैं। इससे योजना के अनुसार चर्चा करना काफी आसान हो जाएगा। इस पाठ के उदाहरण पर बने कुछ सवाल इस तरह से हैं। आप अपने बच्चों और विद्यालय के परिवेशीय संदर्भ का ध्यान रखते हुए अन्य सवाल भी बना सकते हैं।

जानिएः ‘सक्रिय पाठक’ किसी किताब को कैसे पढ़ते हैं?

A. कहानी सुनाने से पहले:

2. कहानी सुनाने के दौरान

3. कहानी सुनाने के बाद

पढ़ेंःबच्चों को कहानी कैसे सुनाएं?

उम्मीद है कि इस तरह कहानी पर सवालों के माध्यम से चर्चा करने से बच्चों में चिंतन की क्षमता कौशल का विकास होगा। इसके साथ ही साथ बच्चे कहानी के पात्रों के साथ एक जुड़ाव विकसित कर पाएंगे और कहानी को आसानी से अपने शब्दों में सुना भी सकेंगे जो सीधे-सीधे बच्चों के मौखिक भाषा विकास को प्रोत्साहित करेगा। जो भविष्य में समझ के साथ पढ़ने वाले पाठक और लेखक के रूप में भी बच्चों को विकसित होने का अवसर प्रदान करेगा।

(आप एजुकेशन मिरर को फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो कर सकते हैं। अपने आलेख और सुझाव भेजने के लिए ई-मेल करें mystory@educationmirror.org पर और ह्वाट्सऐप पर जुड़ें 9076578600 )

Exit mobile version