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कैसे सुनाएं बच्चों को कहानी?

छोटे बच्चों को पढ़ने के प्रति आकर्षित करने के लिए पिक्चर बुक, पोस्टर, कहानियों और कार्टून एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। बच्चों को मौखिक रूप से स्थानीय कहानियों (या लोककथाओं) को सुनने का अनुभव देना, बच्चों को स्थानीय परिवेश, भाषा और व्यवहार से परिचित होने का अवसर सहज ही दे देते हैं। इससे बच्चों की झिझक टूटती है और वे खुलकर अपनी बात कह पाते हैं। ऐसे प्रयास कई संस्थाओं के माध्यम से किये गए हैं। ताकि बच्चों को स्थानीय भाषा की कहानियों को सुनने का अवसर मिल सके।

बालवाड़ी और स्कूल में बच्चों को पढ़ने की तैयारी के लिहाज से ऊपर लिखी बातें बड़े काम की हैं। अब लौटते हैं उस सवाल की तरफ कि बच्चों को कहानी कैसे सुनाएं?

  1. बच्चों को कमरे में या बाहर मैदान में एक गोले में या जैसे भी सारे बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके बैठाएं।
  2. उनको बालगीत या किसी अन्य छोटी सी चर्चा या सवाल के माध्यम से कहानी का क्लू खोजने की तरफ लेकर आएं। यहां से कहानी का नाम बताते हुए और लेखक का जिक्र करते हुए कहानी की तरफ लौट सकते हैं।
  3. कहानी सुनाने के दौरान बीच-बीच मे रुकें, बच्चों को चित्र दिखाएं। अनुमान वाले सवाल पूछें। उनके विचार लें और फिर आगे बढ़े।
  4. कहानी का प्रवाह और आवाज़ इतनी तेज़ हो कि हर बच्चा कहानी के साथ होने का आनंद महसूस कर सके।
  5. हमेशा ध्यान रखें कि कहानी सुनना या सुनाना बच्चों के लिए एक मजेदार गतिविधि होनी चाहिए, यह बोर करने वाली न हो।
  6. बच्चों के स्तर के अनुसार कहानियां चुनें। ये बहुत छोटी या फिर बहुत लंबी नहीं होनी चाहिए। ताकि एक कालांश की अवधि में इसे पूरा किया जा सके और इसके ऊपर बच्चों के साथ बात भी हो सके कि कहानी में उनको क्या सबसे ज्यादा पसंद आया? वे कहानी के पात्र की जगह होते तो क्या करते? किसी पात्र ने जो किया अगर उसकी बजाय कुछ और बात होती तो कहानी में क्या बदलाव आता? ऐसे सवालों के माध्यम से चर्चा को आगे बढ़ा सकते हैं।
  7. कहानी से क्या सीखा? ऐसे सवाल की बजाय बच्चों को कहानी की परिस्थितियों का विश्लेषण करने का मौका चर्चा के माध्यम से दें।
  8. कहानी पर बच्चों को चित्र बनाने का मौका दें। उनको अपने विचार लिखने और लाइब्रेरी में दीवार पर लगाने का मौका दें। इससे बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा मिलेगा।
  9. बच्चों को घर में बड़े लोगों से कहानी सुनने और उनको अपनी पढ़ी हुई कहानियों को घर की भाषा में सुनाने के लिए कह सकते हैं। इससे समुदाय के लोगों का भी स्कूल के काम और गतिविधियों से जुड़ाव बनेगा।
  10. बच्चों को लाइब्रेरी की किताबों से परिचित कराना जरूरी है , क्योंकि इससे उनको अपने पसंद की किताबों के चुनाव में आसानी होती है।इसके लिए बुक डिसप्ले लगा सकते हैं। इसमें नियमित अंतराल पर बदलाव करके बच्चों की रुचि को बनाए रखा जा सकता है। इसके लिए थीम का चुनाव बच्चों की रुचि और समय के अनुसार कर सकते हैं। जैसे 5 सितंबर को शिक्षक दिवस और स्कूल वाली थीम पर डिसप्ले लगाया जा सकता है।

आखिर में लाइब्रेरी की सफलता बच्चों की भागीदारी और लाइब्रेरी को अपना मानने वाली बुनियाद पर टिकी होती है। इसलिए किताबों को सजाने, बुक डिसप्ले लगाने और क्लासरूम को साफ-सुथरा रखने या फिर फटी हुई किताबों की मरम्मत में उनकी भागीदारी जरूर सुनिश्चित करें। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और एक शिक्षक का लाइब्रेरी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित होगा।

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