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रविवार, 18 अक्टूबर 2026

कहानीः हरियाली में है खुशहाली

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बादल बहुत खुश था। उसने समुद्र से बहुत सारा पानी उठाया और उड़ चला आसमान में। सोच रहा था, “आज तो कहीं मजे से बरसूंगा और सारे पेड़ पौधों की प्यास बुझा दूंगा।” वह शहर के ऊपर से गुजरा। नीचे देखा, चारों तरफ कंक्रीट का मैदान फैला था। दूर-दूर तक भी कोई पेड़ पौधा नजर नहीं आ रहा था। बादल बहुत निराश हो गया। सोचने लगा, “यदि यहां बरसता हूं तो सारा पानी बहकर नदी नालों में चला जाएगा और बर्बाद हो जाएगा। ना धरती की प्यास बुझेगी और ना ही पेड़ पौधों को पानी मिलेगा।” उसने निश्चय कर लिया कि वह उस कंक्रीट के शहर में नहीं बरसेगा।

बादल आगे बढ़ गया। काफी दूर चलने पर उसे एक गांव में पेड़ पौधे नजर आए। पेड़ पौधे प्यास से सूख रहे थे इसलिए उदास नजर आ रहे थे। बादल पेड़ पौधों को देखकर खुश हो गया। वह जोर-जोर से गरजने लगा। बादल के गरजने की आवाज सुनकर बिजली रानी भी वहां आ गई। वह भी खुशी के मारे चमकने लगी। बादलों को देखकर मोर खुशी से नाचने लगे वे जानते थे कि अब बारिश होगी और धरती की प्यास बुझ जाएगी।

बादल तेजी से पानी बरसाने लगा। पौधे बारिश में खुशी से झूमने लगे। उन्हें नया जीवन जो मिल गया था। गांव आज बहुत खुश था क्योंकि बादल उसको सदा हरा भरा रहने का का पैगाम दे रहे थे। कंक्रीट का शहर बहुत उदास था क्योंकि पिछले साल की तरह इस साल भी वह बारिश से वंचित रह गया था।

(परिचयः रीता गुप्ता सहारनपुर जिले के मॉडल प्रइमरी स्कूल बेहट नं. 1 में सहायक अध्यापिका हैं। आपको कविताएं और कहानियां लिखना और पढ़ना दोनो काफी पसंद है। यह एजुकेशन मिरर के लिए आपका पहला लेख है।)

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