कई बार अभिभावकों व शिक्षकों की तरफ से भी सवाल पूछा जाता है कि हमारा बच्चा नर्सरी या पहली-दूसरी में पढ़ रहा है, हम उसकी कैसे मदद करें? इस सवाल का आसान सा जवाब है।
भाषा शिक्षण की तैयारी के 10 आसान तरीके
- छोटे बच्चों से खूब बातें करें और उनके सवालों का जवाब दें।
- उनको कविताएं सुनाइए।
- बच्चों को भाषा के आनंद से रूबरू होने के अवसर दें।
- छोटे बच्चों को घर पर ‘बड़े चित्रों’ वाली कहानी की किताबों से उनका परिचय कराएं।
- किताबों से उनको सोने से पहले कहानी पढ़कर उनको सुनाएं। लोककथाओं को भी सुनाएं, अगर आपको याद हों।
- कहानी सुनाने के दौरान या बाद में में बच्चों की प्रतिक्रिया को सुनें, जहाँ जरूरी लगे वहाँ खुद भी सवाल भी करें।
- बच्चों के बीच बातचीत के मौके बनाएं ताकि वे किसी मुद्दे पर बात कर सकें।
- भाषा का मुख्य उद्देश्य अपनी कल्पना, विचार, सोच, प्रतिक्रिया व भावनाओं को जाहिर करना है। इसका अवसर एक बच्चे को उपलब्ध होना चाहिए। बच्चों को अपने घर की भाषा में बोलने का अवसर देना, इस दृष्टि से बेहद अहम है। इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से कक्षा-कक्ष में देखा जा सकता है।
- स्कूल स्तर पर कक्षा-कक्ष में सामूहिक रूप से बालगीत करना, बच्चों को आसानी से भाषा के आनंद से जोड़ता है।
- कक्षा-कक्ष में सभी बच्चों को सामूहिक रूप से कहानी सुनाएं। माहौल सहज रखें। कहानी में बच्चों को क्या अच्छा लगा, ऐसे सवाल करें। किसी पात्र की जगह वे होते तो क्या करते, ऐसी चर्चा भी कर सकते हैं।
बच्चों के साथ ऐसे छोटे-छोटे प्रयासों को करने के साथ-साथ बच्चों को पढ़ने के दौरान होने वाली समस्याओं को नोट करें। उस नोट्स को साथी शिक्षकों के साथ शेयर करें। उसके समाधान के कारगर तरीके पर चर्चा करें। अगर आप किसी शिक्षक नेटवर्क या फेसबुक ग्रुप से जुड़े हैं तो अपनी समस्या का समाधान वहाँ भी खोज सकते हैं। ब्लॉक और जिला स्तर पर भाषा शिक्षकों का एक ह्वाट्सऐप ग्रुप बना सकते हैं जो भाषा शिक्षण में रुचि रखते हैं।

