- पुस्तकालय क्या है?
- पुस्तकालय क्यों होना चाहिए?
- पुस्तकालय कैसा होना चाहिए?
- पुस्तकालय कहाँ-कहाँ होना चाहिए?
‘लाइब्रेरी के दरवाज़े पर मिक्की माउस खड़ा हो’
प्रश्न 1: पुस्तकालय क्या है?
उत्तर : बच्चे कहते है पुस्तककालय वो कमरा है जहाँ ढेर सारी किताबें होती हैँ !
प्रश्न 2: पुस्तकालय क्यों होना चाहिए?
उत्तर : इसलिए जिससे कि हम कहानी पढ़ सकें!
तो ख़ुशी कहती है इसलिए ताकि हम टीचर से छुपकर पढ़ने के बहाने सांप सीढ़ी और चूहे-बिल्ली पकड़ वाला खेल खेल सकें (कुछ किताबों में बीच में खेल का एक पेज़ भी होता है। बच्चे इसके बारे में बता रहे थे। )!
प्रश्न 3: पुस्तकालय कैसा होना चाहिए?
उत्तर : खूब बड़ा सा कमरा
खूब सजा हुआ जैसे झालर से, फूलों से, गुब्बारे से, झंडियों से, झूमर से !
फैज़ान कहते है फ्रिज भी होनी चाहिए जिससे प्यास लगने पे ठंडा पानी पी सकें
समीर आलम कहते है कि उसमें T.V लगा होना चाहिए डिश वाला जिसे कोई कहानी देख भी सकें !
रिंकी कहती है पुस्तकालय के बाहर ढेर सारे गमले लगे होने चाहिए !
किसी बच्चे ने बोला कि लाइब्रेरी के दरवाज़े पर मिक्की माउस खड़ा होना चाहिए जिससे हाथ मिला के तब अंदर जायें हम और वो हमारा स्वागत करे !
लाइब्रेरी में किताबें कैसी हों?
तो रूबी कहती है किताबें शीशे वाली अलमारी में होनी चाहिए जिससे ढूंढ़ने में आसानी हो। वहीं रूचि उनकी जुड़वाँ बहन कहती है कि पुस्तकालय में किताबें ऐसे लगानी चाहिए जैसे तितली वाली कहानी की किताब एक अलमारी में लगा दो और उस अलमारी पे तितलियाँ चिपका दो। या लटका दो जिससे सबको पता चल जाये कि इसमें तितली कि कहानी वाली किताबें हैं।
किताब में हमारी कहानी भी आ सकती है क्या?
सानिया के पास उत्तर नहीं प्रश्न था – कि पुस्तकालय कि किताबों में कुछ बच्चों कि कहानियां भी होती है ये बच्चे कौन है, हमारी कहानी भी किताब में आ सकती है क्या? उनका कहना है कि पुस्तकालय में एक ऐसी किताब भी रखी जानी चाहिए जिसमे हम बच्चों की कहानी हो और हम एक-दूसरे की कहानी पढ़ सकें।
जैसे मैनुद्दीन की बकरी खो गई तो उसकी पिटाई कैसे हुई, फिर बकरी ‘कांजी हाउस’ में मिली ! मैंने सोचा है प्रत्येक सत्र एक कॉपी रखेंगे जिसमे उस सत्र के बच्चों कि कहानियां संकलित कर उसे प्रिंट करा पुस्तकालय में रखा जाये, इस सत्र से ये काम शुरू किया है।
अस्पताल में क्यों होना चाहिए पुस्तकालय?
प्रश्न 4: पुस्तकालय कहाँ कहाँ होना चाहिए?
उत्तर : सब बच्चे कहते है स्कूल में होना चाहिए
पूछा और कहीं भी बन जाये जहाँ तुम चाहो तो कहाँ बनाओगे?
फैज़ान कहते हैं अस्पताल में क्यों कि वहां मरीज़ के साथ आने वाले तीमारदार बोर होते है तो किताबें पढ़ के मन बहला सकते हैं। फैज़ान के माता पिता नहीं है तो बुआ पालती है उसे, बुआ का ऑपरेशन हुआ कुछ दिन पहले तो वो कई दिन तक अस्पताल में बैठ के बोर हुए। शायद इस वज़ह से ऐसी बात उसके मन में आई। आदित्य का भी यही कहना है उनका तो यह भी मानना है कि नर्स दवा के साथ साथ कहानी भी सुनाये ती बच्चे जल्दी ठीक होंगे !
