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बच्चों ने कहा, “किताबें हमारी सबसे अच्छी दोस्त हैं”

ज़ैतून ज़िया पिछले 5 सालों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही हैं। वर्तमान में आप उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सहायक अध्यापक के रूप में उच्च प्राथमिक विद्यालय गाजू, विकास खण्ड कछौना में काम कर रही हैं। आपको लिखना और पढ़ना दोनों बेहद पसंद हैं। उन्होंने अपने विद्यालय में लाइब्रेरी में जीवंत बनाने के सिलसिले में उन्होंने बच्चों के साथ संवाद किया। आगे की पूरी बातचीत पढ़िए उन्हीं के शब्दों में।

‘लाइब्रेरी के दरवाज़े पर मिक्की माउस खड़ा हो’

library-up-2ऊपर के सवालों पर जब विद्यालय में बच्चों से बात हो रही थी तो बड़ी रोचक और गहरी बातें सामने आयीं। ऐसा लगा कि एक शिक्षक होकर हमें अपने बच्चों के लिए अच्छा श्रोता बनना कितना आवश्यक है। अगर हम खुद बच्चों को नहीं सुनेंगे तो शायद बहुत सी सुनहरी, चमकीली संभावनाएं खो देंगे !! और यदि आप अच्छे पाठक हैं तो किसी भी लेख को पहले अक्षर से आखिरी तक पढ़ना चाहिए। किन्तु वर्तमान समय में एक अच्छा श्रोता और एक अच्छा  पाठक बनना दोनो  ही बहुत कठिन है !!

प्रश्न 1: पुस्तकालय क्या है?
उत्तर : बच्चे कहते है पुस्तककालय वो कमरा है जहाँ ढेर सारी किताबें होती हैँ !

प्रश्न 2: पुस्तकालय क्यों होना चाहिए?
उत्तर  : इसलिए जिससे कि हम कहानी पढ़ सकें!
तो ख़ुशी कहती है इसलिए ताकि हम टीचर से छुपकर पढ़ने के बहाने सांप सीढ़ी और चूहे-बिल्ली पकड़ वाला खेल खेल सकें (कुछ किताबों में बीच में खेल का एक पेज़ भी होता है। बच्चे इसके बारे में बता रहे थे। )!

प्रश्न 3: पुस्तकालय कैसा होना चाहिए?
उत्तर : खूब बड़ा सा कमरा
खूब सजा हुआ जैसे झालर से, फूलों से, गुब्बारे से, झंडियों से, झूमर से !
फैज़ान कहते है फ्रिज भी होनी चाहिए जिससे प्यास लगने पे ठंडा पानी पी सकें
समीर आलम कहते है कि उसमें T.V लगा होना चाहिए डिश वाला जिसे कोई कहानी देख भी सकें !

रिंकी कहती है पुस्तकालय के बाहर ढेर सारे गमले लगे होने चाहिए !

किसी बच्चे ने बोला कि लाइब्रेरी के दरवाज़े पर मिक्की माउस खड़ा होना चाहिए जिससे हाथ मिला के तब अंदर जायें हम और वो हमारा स्वागत करे !

लाइब्रेरी में किताबें कैसी हों?

तो रूबी कहती है किताबें शीशे वाली अलमारी में होनी चाहिए जिससे ढूंढ़ने में आसानी हो। वहीं रूचि उनकी जुड़वाँ बहन कहती है कि पुस्तकालय में किताबें ऐसे लगानी चाहिए जैसे तितली वाली कहानी की किताब एक अलमारी में लगा दो और उस अलमारी पे तितलियाँ चिपका दो। या लटका दो जिससे सबको पता चल जाये कि इसमें तितली कि कहानी वाली किताबें हैं।

library-up-1वैसे ही मछली वाली, चिड़िया वाली, शेर वाली,गिलहरी वाली, लोमड़ी वाली कहानियों को भी अलग से लगाया जाए। यानि किताबों के वर्गीकरण की एक श्रेणी बच्चों के मन में आकार ले रही हैं। मैं कोशिश करुँगी कि अब इसी तरह व्यवस्थित करूँ हमारे पुस्तकालय को।

किताब में हमारी कहानी भी आ सकती है क्या?

सानिया के पास उत्तर नहीं प्रश्न था – कि पुस्तकालय कि किताबों में कुछ बच्चों कि कहानियां भी होती है ये बच्चे कौन है, हमारी कहानी भी किताब में आ सकती है क्या? उनका कहना है कि पुस्तकालय में एक ऐसी किताब भी रखी जानी चाहिए जिसमे हम बच्चों की कहानी हो और हम एक-दूसरे की कहानी पढ़ सकें।

जैसे मैनुद्दीन की बकरी खो गई तो उसकी पिटाई कैसे हुई, फिर बकरी ‘कांजी हाउस’ में मिली ! मैंने सोचा है प्रत्येक सत्र एक कॉपी रखेंगे जिसमे उस सत्र के बच्चों कि कहानियां संकलित कर उसे प्रिंट करा पुस्तकालय में रखा जाये,  इस सत्र से ये काम शुरू किया है।

अस्पताल में क्यों होना चाहिए पुस्तकालय?

प्रश्न 4: पुस्तकालय कहाँ कहाँ होना चाहिए?
उत्तर : सब बच्चे कहते है स्कूल  में होना चाहिए
पूछा और कहीं भी बन जाये जहाँ तुम चाहो तो कहाँ बनाओगे?
फैज़ान कहते हैं अस्पताल में क्यों कि वहां मरीज़ के साथ आने वाले तीमारदार बोर होते है तो किताबें पढ़ के मन बहला सकते हैं। फैज़ान के माता पिता नहीं है तो बुआ पालती है उसे,  बुआ का ऑपरेशन हुआ कुछ दिन पहले तो वो कई दिन तक अस्पताल में बैठ के बोर हुए। शायद इस वज़ह से ऐसी बात उसके मन में आई। आदित्य का भी यही कहना है उनका तो यह भी मानना है कि नर्स दवा के साथ साथ कहानी भी सुनाये ती बच्चे जल्दी ठीक होंगे !

library-up-3कुछ बच्चे कहते है पुस्तकालय बाग़ में हो, क्योंकि उनका मन करता हैँ कि खेत में, बाग़ में पेड़ के नीचे बैठ के कहानी पढ़ें,। मैंने बोला लेकिन बाग़ में तो किताबें कहाँ रखेंगे? तो सुझाव आया कि जो चार पहिये वाली गाड़ियां पुरानी हो के पुलिस स्टेशन के बाहर पड़ी होती है उसको मांग लाएं उसको रंग के उसमें किताबें सजा दें अंदर और बाग़ में खड़ी कर दें !! इसकी भी कोशिश कि जा सकती है, यदि ग्रामवासियों का सहयोग मिले।

‘ट्रेन में भी हो पुस्तकालय’

library-up-4कुछ बच्चों ने कहा कि पुस्तकालय तो घर में भी होना चाहिए क्यों कि छुट्टियों में ही पढ़ने का मन होता है और तब स्कूल बन्द रहता है,  तो एक छोटी सी अलमारी को गेरू वाले रंग से  लीप के  उसको खूब सजा लें उसमें पुस्तकें लगा दें और जब भी मन हो दोस्तों के साथ वहां पढ़ें बैठ के, जो भी घर आये उसको दिखाए अपना पुस्तकालय ! कंचन कहती है कि ट्रेन में भी होना चाहिए क्यों कि उनके मामा और नानी बिहार में है तो वो ज़ब भी इत्ती दूर जाति हैँ बहुत बोर होती है पुस्तकालय होता तो कहानियाँ पढ़ लेती बैठ के!

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वृजेश

बतौर शिक्षक जैतून ज़िया जी के संवाद करने का कौशल और तरीका सीखने योग्य है। बच्चों के साथ जुड़ाव हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसा होने पर ही बच्चे अपने मन की बात कहते हैं। उत्तर प्रदेश के किसी विद्यालय में लाइब्रेरी को लेकर बच्चे ऐसा सोच रहे हैं और उसे अभिव्यक्ति दे रहे हैं यह बहुत बड़ी बात है। आपके लेखन का सिलसिला सतत जारी रहे और लाइब्रेरी व किताबों के साथ बच्चों का रिश्ता अर्थपूर्ण और आनंद से भरपूर हो ऐसी शुभकामनाएं हैं।

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