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बच्चों में ‘पढ़ने की आदत’ बढ़ाने के 7 ख़ास टिप्स



अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे भी पढ़ें, तो एक शिक्षक के रूप में आपको ऐसे मौके बनाने होंगे जब वे आपको पढ़ता हुआ देख सकें। आप जो किताब पढ़ रहे हैं, उससे कुछ पढ़कर बच्चों को सुनाएं भी। अगर आपने बच्चों के मन में यह भरोसा जगा दिया कि पढ़ना बहुत आनंददायी और मजेदार चीज है। किसी किताब को पढ़ते हुए, सीखना तो अपने आप हो ही जाता है। तो ऐसा भरोसा निश्चित रूप से बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।

ऐसे बच्चे पढ़ने को भी एक रोचक और मजेदार गतिविधि की तरह देखेंगे और यह भी उनके लिए एक खेल की तरह हो जाएगा, जहाँ वे लाइब्रेरी में जाकर पसंद की किताब उठाएंगे, उसके चित्रों को देखेंगे और कहानी को पढ़ने के साथ-साथ कहानी में क्या अच्छा लगा, अपने दोस्तों और शिक्षक के साथ साझा भी करेंगे।

बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए ऐसे तो बहुत सारी गतिविधियां हैं,जिनका चुनाव किया जा सकता है। लेकिन रीड अलाउड (Read Aloud) की गतिविधि अपने दीर्घकालिक प्रभाव और बच्चों को प्रेरित करने में बेहद मददगार होने के कारण एक विशेष महत्व रखती है। आइए अब जानते हैं कि बच्चों को पढ़ने के लिए कैसे प्रेरित करें –  

1. खुद पढ़ें

बच्चे अक्सर अपने माता-पिता और शिक्षकों को देखकर सीखते हैं। इसलिए, पढ़ने का उदाहरण भी शिक्षकों और माता-पिता की तरफ से आना चाहिए। जब आप विद्यालय में कहानी या कविता की कोई किताब पढ़ रहे होते हैं तो बच्चे आपके पास आते हैं और पूछते हैं कि आप क्या पढ़ रहे हैं। वे उस किताब को लेकर देखते भी हैं, इस लम्हे में किताब पढ़ने की एक स्वाभाविक सी ललक उनके भीतर आकार लेती है।

2. रोचक किताबें चुनें

ऐसी किताबों का चुनाव बच्चों के लिए करें, जो उनके मन को भा जाए। यानि किताब का रोचक होना जरूरी है – यानि किताब के चित्र, लिखित सामग्री बच्चों के आयु और मनोवैज्ञानिक अभिरुचि के साथ तालमेल में होनी चाहिए। इस काम में मुझे एकलव्य प्रकाशन और इकतारा प्रकाशन की पुस्तकों से बहुत मदद मिली। ऐसी किताबों में विषयों की विविधता, बातचीत करने की गुंजाईश और चित्रों की आकर्षक प्रस्तुति ने बच्चों के साथ सहजता से जुड़ाव बनाने में मदद की।

3. ‘पढ़ने की घंटी’

स्कूल के टाइमटेबल में लाइब्रेरी या किताबों के साथ समय बिताने का समय निर्धारित होना बहुत मदद करता है। इसे हम DEAR (Drop Everything And Read) टाइम भी कहते हैं।

इससे बच्चों में पढ़ने की आदत बनाने में मदद मिलती है क्योंकि टाइम टेबल होना और उसकी निरंतरता आदत निर्माण की बुनियादी जरूरतों को पूरा करता है।

4. पढ़ने के लिए करें प्रोत्साहित

बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। प्रार्थना सभा में उन्हें किताबों के बारे में बात करने के नियमित अवसर दें, जहां वे स्वतः Read Aloud, Book Talk और Role play जैसी गतिविधियाँ नियमित रूप से कर सकें।पढ़ने के लिए मिलने वाला सतत प्रोत्साहन ही बच्चों में पढ़ने की आदत का विकास करता है। इसलिए बच्चों के छोटे-छोटे प्रयासों को विभिन्न अवसरों पर सराहें और पढ़ना जारी रखने के लिए प्रेरित करें।

5. ‘भयमुक्त माहौल’ बनाएं

बच्चे पढ़ते हुए तभी दिखते हैं जब पठन सामग्री बच्चों की रुचि और स्तर की हो। इसके लिए हमारा संग्रह समृद्ध होना चाहिए। इसके साथ ही हमें नियमित रूप से विभिन्न संसाधनों से सामग्री जुटानी चाहिए और पढ़ने के लिए भयमुक्त माहौल भी देना चाहिए।

घर और समाज का माहौल तो ‘परीक्षा वाली पढ़ाई’ के लिए अनुकूल होता है, लेकिन लाइब्रेरी या बाल साहित्य वाली किताबों की बात आते ही, पढ़ने को हतोत्साहित करने की कोशिश शुरू हो जाती है। इसलिए बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ाना देने के लिए भयमुक्त और प्रोत्साहित करने वाला माहौल देना बहुत जरूरी है।

6. जो भी पढ़ें, उस पर बात जरूर करें

पढ़ने की आदत बनाने और नई किताबों प्रति बच्चों को आकर्षित करने में किताबों पर होने वाली चर्चा बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए जो भी कविता-कहानी बच्चे पढ़ें, उस पर बातचीत करने का मौका जरूर दें। 

किताबों पर होने वाली बातचीत या चर्चा से बच्चों की एक स्पष्ट पसंद-नापसंद का भी विकास होता है। इसके साथ ही बच्चे जान पाते हैं कि हर किसी की पसंद अलग-अलग होती है। बच्चों की अपनी समझ को आकार देने के लिये उनकी बातों को धैर्य-पूर्वक सुनना और उन्हें लिखने या चित्र बनाने का मौका देने से मुझे बहुत मदद मिली।

7. पढ़ने को एक मजेदार गतिविधि बनाएं

बच्चों के लिए पढ़ने को एक मजेदार गतिविधि बनाने के लिए खेल, नाटक, और अन्य रचनात्मक तरीकों का उपयोग किया जा सकता है। इसमें सबसे उपयोगी मुझे ‘किताबों के डिसप्ले’ की गतिविधि लगी, जिसमें हम थीम बेस्ड किताबों का चयन करते हैं। इसके डिसप्ले के बाद इसमें कुछ अन्य गतिविधियां को जोड़कर सक्रिय और जीवंत डिसप्ले तैयार करते हैं।

आखिर में कह सकते हैं कि पुस्तकालय को सक्रिय और जीवंत बनाना एक निरंतर गतिमान रहने वाली प्रक्रिया है। इसी प्रक्रिया में बच्चों में किताबों के प्रति जिज्ञासा बढ़ती है और उनमें पढ़ने की आदत का भी विकास होता है। इस प्रकार रीड अलाउड करना और किताब पर होने वाली चर्चा में अपनी प्रतिक्रिया को शामिल करते हुए बच्चों की बातचीत को धैर्यपूर्वक सुनना एक जरूरी कदम है।

इसके साथ ही बच्चों को तर्क करते हुए मौलिक चिंतन करने का मौका देना और अपने विचारों को लिखने-पढ़ने का अवसर देना मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। इससे एक भाषा समृद्ध कक्षा बनती है, जो बच्चों को भाषायी विकास के विविध अवसर सहजता से उपलब्ध कराती है।

(लेखक परिचय: जय शेखर, उत्तर प्रदेश के एक सरकारी विद्यालय में बतौर शिक्षक कार्य कर रहे हैं। पुस्तकालय, भाषा शिक्षण और बच्चों को दीवार पत्रिका ‘तितली’ के माध्यम से उनके रचनात्मक योगदान का अवसर दे रहे हैं। इस लेख में उन्होंने उन्होंने अपने नये विद्यालय में बच्चों के साथ रीड अलाउड करने के एक रोचक अनुभव को साझा किया है। इस लेख के बारे में अपने अनुभव, विचार और टिप्पणी जरूर लिखें।)

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