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नये शैक्षणिक सत्र 2018-19 की प्रमुख चुनौतियां और संभावनाएं क्या हैं?

प्रिय शिक्षक साथियों,

आप सभी को नये शैक्षणिक सत्र साल 2018-19 की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयां। बीते कई सत्रों की भांति यह सत्र भी बहुत सी चुनौतियों और संभावनाओं के साथ दस्तक दे रहा है। नई शिक्षा नीति का इंतज़ार जारी है। शिक्षा के क्षेत्र में पीपीपी मोड के भविष्य की राह क्या होगी, क्या इसका विस्तार जिला स्तर के संस्थानों डायट पर भी पड़ेगा, इस तरह के संशय और सवाल जिला स्तर के अधिकारी आपसी चर्चाओं और विमर्श में पूछ रहे हैं, मगर कोई सीधा-सीधा जवाब उनको भी नहीं मिल रहा है। नेशनल अचीवमेंट सर्वे के आँकड़े सार्वजनिक हो चुके हैं, विभिन्न राज्यों द्वारा अपनी उपलब्धि को बढ़ाने के तमाम प्रयास भी इस सत्र में गति पकड़ेंगे। नीति आयोग द्वारा विकास के प्रमुख इंडीकेटर्स पर ऊपर बढ़ने के आकांक्षी ज़िलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, इसके भी क्रियान्वयन के पहले दौर के परिणाम और शुरूआती रुझान हमारे सामने सत्र के मध्य तक आने लगेंगे।

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शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं और सीमाओं के रेखांकन का सिलसिला विगत वर्षों की भांति जारी रहेगा। शिक्षकों को प्रोत्साहित करने और उनके पेशेवर विकास पर ध्यान देने की जरूरत ज्यों की त्यों बनी हुई है। उम्मीद है कि इस साल में विद्यालयों के भौतिक विकास और साफ़-सफ़ाई के साथ-साथ शैक्षणिक एजेंडे को प्रमुखता मिलेगी और हमारे शिक्षक साथी शैक्षिक चुनौती से जुड़े सवालों का सामना करने के लिए खुद को तैयार करेंगे। पूरे देश में पढ़ने की संस्कृति और पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करने के लिए लायब्रेरी और पढ़ने के लिए समय देने का मुद्दा पूरे वर्ष प्राथमिकता में बना रहेगा और इस दिशा में विभिन्न संस्थाओं द्वारा इसे प्रोत्साहित करने के प्रयास किये जाएंगे। इस वर्ष राजस्थान द्वारा 19 जून से अपने शैक्षणिक सत्र के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद के पहले दिन को ‘रीडिंग डे’ रूप में मनाना और पढ़ने से जुड़ी गतिविधियों को अगले कुछ सप्ताह तक जारी रखने की पहल सराहनीय है।

नये सत्र में आने से पहले बहुत से बच्चों ‘समर कैंप’ में कंप्यूटर, आत्मरक्षा, लायब्रेरी, खेल, संगीत और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेकर अपने समय का अच्छा उपयोग किया है। तो कुछ बच्चों ने छुट्टियों में घूमने के लिए समय का उपयोग किया है और नई ऊर्जा के साथ नये सत्र के लिए बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। हमारे शिक्षक साथी भी लंबी छुट्टियों के बाद फिर से स्कूलों की तरफ लौट रहे हैं, तो कुछ साथी 19 जून के बाद से ही लगातार विद्यालय जा रहे हैं। अभी हर तरफ बारिश का इंतज़ार हो रहा है। बच्चे स्कूल खुलने से पहले मिले होमवर्क को लेकर तनाव में हैं तो कुछ होमवर्क पूरा करके बेफिक्र हैं। ज्यादा से ज्यादा होमवर्क बच्चों को अन्य रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेने और छुट्टियों को आनंद के साथ बिताने के अनवसरों को सीमित कर देता है, ऐसे में जरूरी है कि होमवर्क को पढ़ाई-लिखाई से जुुड़े रहने की प्रक्रिया का एक छोटा सा हिस्सा भर माना जाये। रीडिंग जैसेअसाइनमेंट भी बच्चों को दिये जाने चाहिए ताकि वे मनपसंद किताबों को पढ़ सकें और सत्र की शुरूआत में अपने अनुभवों को लिखित व मौखिक रूप से साझा कर सकें।

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एजुकेशन मिरर की पूरी टीम की तरफ से आप सभी को आगामी सत्र की बहुत-बहुत बधाइयां और शुभकामनाएं। लिट्रेसी हीरोज़ वाली सीरीज़ को इस सत्र में विस्तार मिलेगा। पढ़ने की आदत को लेकर एक अभियान पूरे साल जारी रहेगा। शिक्षा से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की हलचल भी आप समय-समय पर पढ़ते रहेंगे। इस सत्र में हम शिक्षकों की डायरी को नियमित रूप से प्रकाशित करने को प्राथमिकता में शामिल कर रहे हैं ताकि शिक्षक साथियों के अनुभवों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सके और आपस में संवाद व विमर्श के अवसरों का विस्तार किया जा सके। इस प्लेटफॉर्म को हम आपके लिए उपयोगी और जीवंत बनाने के लिए सतत प्रयास करते रहेंगे। आपके सवालों, सुझावों और लिखने के माध्यम से सहयोग का हार्दिक अभिनंदन और स्वागत है।

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