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साल 2017-18 के बजट में शिक्षा क्षेत्र को क्या मिला?

एक सरकारी स्कूल की कहानी1 फरवरी को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2017-18 का आम बजट पेश किया। इस बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए कुल 79, 685.95 करोड़ रूपए का आवंटन किया गया। इसमें से स्कूली शिक्षा (प्राथमिक और सीनियर सेकेंडरी) के लिए  46,356.25 करोड़ रूपए और शेष उच्च शिक्षा के लिए आवंटित किया गया है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन कोर्सेज की शुरूआत होगी। झारखंड और गुजरात में एम्स खुलेंगे। सीबीएसई की भूमिका केवल शैक्षिक कार्यों तक सीमित रहेगी और उच्च शिक्षा के लिए यूजीसी में सुधार किया जाएगा, इसका भी संकेत सरकार की तरफ से इस बार के बजट में दिया गया।

प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पर असर

स्कूली शिक्षा का बजट पिछले साल की तुलना में मात्र एक हज़ार करोड़ रूपए ज्यादा इस राशि से प्राथमिक शिक्षा की जरूरतों को पूरा करना संभव नहीं होगा क्योंकि प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं और बहुत से स्कूलों में पर्याप्त आधारभूत संरचनाओं का अभाव है। वहीं प्राथमिक स्तर की लगभग 10 फीसदी स्कूलें सिंगल टीचर स्कूल हैं ऐसे में शिक्षा का अधिकार कानून को ज्यादा अच्छे से लागू करने के लिए संसाधनों का अभाव बना रहेगा।

शिक्षाविद और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी गहरी समझ रखने वाले पत्रकार अम्बरीश राय कहते हैं, “एक साल के इंतज़ार के बाद इस बजट में उम्मीद थी कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए ज्यादा राशि का आवंटन किया जाएगा, मगर उम्मीदों के विपरीत स्कूली शिक्षा को इस बजट में पूरी तरह से दरकिनार किया गया है।”

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, “हम स्कूलों में सालाना लर्निंग आउटकम को मापने की व्यवस्था की जा रही है। विज्ञान की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए पाठ्यक्रम में लचीलापन लाया जाएगा।” स्कूलों में मूल्यांकन के लिए (असेसमेंट प्रोग्राम) के लिए साल 2016-17 में 5 करोड़ रूपए का आवंटन किया गया था, जबकि इस बार के बजट में (2017-18) केवल 67 लाख रूपए का आवंटन किया गया है। यानि कुछ मदों में कटौती भी गई है।

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