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पहली-दूसरी के बच्चों को मिले होमवर्क और स्कूल बैग से छुट्टीः सीबीएसई

बच्चे, पढ़ना सीखना, बच्चे का शब्द भण्डार कैसे बनता हैकेन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की तरफ से जारी एक सर्कुलर में बच्चों का बोझ कम करने की दिशा में क़दम उठाने की अपील की गई है। ताकि बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके विपरीत प्रभाव को कम किया जा सके। इस सर्कुलर के सुझाव बस्तों का बोझ कम करने की दिशा में बेहद अहम हैं।

मसलन बच्चों को पहली-दूसरी के बच्चों को होमवर्क न देना, दो बच्चों के बीच में आधी-आधी किताबें लाने जैसी व्यवस्था, स्कूल में सबके लिए साफ़ पानी की व्यवस्था करना ताकि बच्चों को घर से पानी की भारी बोतलें लेकर स्कूल न आना पड़े। सीबीएसई की नई पहल स्वागत योग्य है।

क्या कर सकते हैं स्कूल?

  1. स्कूल की असेंबली और विभिन्न कार्यक्रमों में भारी बस्ते के विपरीत असर के बारे में बातचीत की जाए।
  2. बच्चों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाए कि वे अपना बैग रोज़ाना चेक करें ताकि ग़ैर-जरूरी किताबें और सामग्री लेकर स्कूल न आएं।
  3. किताबें भूलने के सिलसिले में बच्चों को सज़ा न मिले, क्योंकि इस डर से वे सारी किताबें रोज़ लेकर स्कूल आ सकते हैं।
  4. सभी बच्चों व शिक्षकों के लिए स्कूल में साफ़ पानी की व्यवस्था हो। ताकि बच्चों को घर से पानी की भारी बोतल लेकर स्कूल न आना पड़े।
  5. स्कूलों की तरफ से साप्ताहिक टाइम टेबल ऐसा बने ताकि बच्चों को न्यून्तम सामग्री लानी पड़े।
  6. प्रोजेक्ट वर्क और अन्य गतिविधियों को सामूहिक रूप से स्कूली समय में ही करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इस तरह के काम को होम-वर्क के रूप में न दिया जाए।
  7.  पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को किसी तरह का होमवर्क नहीं दिया जाना चाहिए और उनको बस्ता लेकर स्कूल आने की जरूरत भी नहीं है।

शिक्षकों के लिए सुझाव

  1. प्रधानाचार्यों की तरफ से शिक्षकों से संवाद हो कि बच्चों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दें कि उनको स्कूल में कौन सी पाठ्यपुस्तकें और कॉपियां इत्यादि लेकर आनी हैं। किताब या वर्क बुक न लाने वाली स्थिति में किसी भी बच्चे को सज़ा न दी जाए, क्योंकि इस डर से बच्चे सभी किताबों के साथ स्कूल आ सकते हैं।
  2. शिक्षकों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वे  बच्चों को पढ़ाने के लिए वैकल्पिक तरीकों (जैसे आईसीटी) का इस्तेमाल करें।
  3. शिक्षकों को पन्नों का इस्तेमाल वर्क बुक के रूप में करने को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  4. शिक्षक बच्चों के जोड़े बना सकते हैं और इन जोड़ों को आधी-आधी किताबें लेकर स्कूल आने के लिए कहा जा सकता है। इससे दोनों बच्चों के बस्ते का बोझ कम हो जाएगा।

क्या करें अभिभावक?

  1. बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने में अभिभावक भी अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। अभिभावक सम्मेलन में भारी बस्तों से होने वाले नुकसान पर उनसे बात की जा सकती है।
  2. प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों का बस्ता व्यवस्थित करने में अभिभावक मदद कर सकते हैं।
  3. बच्चे अपने स्कूल बैग में बहुत सारी चीज़ें आदतन ज़मा करते रहते हैं, ऐसे में उनके बस्ते की नियमित सफाई जरूरी है।
  4. बस्ते बच्चों के कंधे पर चुस्ती से टंगे होने चाहिए, बजाय इसके कि वे कंधों से झूल रहे हों।

इन बातों के अलावा भी स्कूल अपने स्तर बस्तों का बोझ कम करने के लिए जरूरी क़दम उठा सकते हैं।

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