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ऑनलाइन लर्निंगः उत्तर प्रदेश के शिक्षक कोविड-19 के दौर में क्या कर रहे हैं?

हमने आपके साथ एजुकेशन मिरर के फेसबुक पेज़ और ट्विटर हैंडल पर एक संदेश साझा किया था, “अगर आप उत्तर प्रदेश के किसी विद्यालय में बतौर शिक्षक काम कर रहे हैं तो अपने अनुभव साझा करें कि आप लॉक डाउन में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं? खुद के सीखने के लिए और बच्चों का घर पर रहते हुए सीखने-सिखाने की गतिविधि से जुड़ाव बनाए रखने के लिए।

यह क्राफ्ट वर्क शिक्षिका श्रुति श्रीवास्तव के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों ने बनाया है। आप उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में शिक्षण कार्य कर रही हैं।

आप ह्वाट्सऐप या यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से बच्चों के साथ कौन-कौन सी गतिविधियां कर रहे हैं? क्या आप खुद भी कोई किताब पढ़ रहे हैं तो उसका नाम शेयर करिये। इसे रीट्वीट करें और अपनी टिप्पणी लिखें। इसे हम एजुकेशन मिरर पर स्टोरी के रूप में पब्लिश करेंगे।” इसके लिए हम विभिन्न शिक्षक साथियों के प्रयासों को यहां पर साझा कर रहे हैं। आप पढ़िए और अपनी टिप्पणी लिखिए। शिक्षक साथियों के इन प्रयासों को प्रोत्साहित भी करिए।

यू-ट्यूब चैनल पर रचनात्मक गतिविधि

उत्तर प्रदेश के शिक्षकों का उत्साह ऑनलाइन लर्निंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ख़ासतौर पर फेसबुक, ट्विटर और ह्वाट्सपै को लेकर काफी ज्यादा है। नियमित विद्यालय के दौरान भी इन सभी प्लेटफॉर्म का काफी इस्तेमाल होता था। लेकिन इन दिनों में इसका इस्तेमाल ख़ासतौर पर बच्चों से जुड़े रहने और अपने लिए शिक्षण-अधिगम की अच्छी सामग्री व संसाधनों तक पहुंचने के लिए किया जा रहा है। मिसाल के तौर पर बलरामपुर जिले के एक शिक्षक जय शेखर यू-ट्यूब पर काफी सक्रिय हैं और बच्चों के लिए अलग-अलग वीडियो बना रहे हैं और बच्चों के साथ शेयर कर रहे हैं। ताकि इस समय का रचनात्मक इस्तेमाल हो सके और हिन्दी भाषा में उपयोगी संसाधन के सृजन का प्रयास भी निरंतर चलता रहे।

यू-ट्यूब और ह्वाट्सऐप से बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने का प्रयास

वर्तमान स्थिति में बच्चों व अभिभावकों से सीधे संपर्क न हो पाने वाली स्थिति का समाधान निकालते हुए प्राथमिक विद्यालय सोहरामऊ नवाबगंज की शिक्षिका स्नेहिल पाण्डेय ने अभिभावकों के सक्रिय नंबर की लिस्ट का एक ह्वाट्सऐप ग्रुप बनाया। इसमें बच्चों को होमवर्क देना शुरू किया। इसके साथ ही साथ अलग-अलग टॉपिक पर बने वीडियो को यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से अभिभावकों के मोबाइल के जरिये बच्चों तक पहुंचाने का काम कर रही हैं।

ऑनलाइन शिक्षण के इन प्रयासों के सामन ही अन्य जिलों में शिक्षक बच्चों के लिए रचनात्मक वीडियो बनाने का काम कर रहे हैं। कुछ वीडियोज़ उन्होंने एजुकेशन मिरर के साथ ट्वीट करके साझा भी किया है।

हिन्दी शिक्षण हेतु बच्चों के लिए रचनात्मक वीडियो का इस्तेमाल

सुरेंद्र शर्मा ने कक्षा दो के छात्रों के लिए कलरव के एक पाठ ‘टपका का डर’ को समझाने के लिए एक वीडियो बनाया है। ऐसे प्रयास रेखांकित करने वाले हैं।


शिक्षिका अर्चना जायसवाल ने अपने प्रयासों के बारे में साझा किया, “प्राथमिक विद्यालय दौलतपुर, मसौधा,अयोध्या के छात्रों ने व्हाट्सएप ग्रुप केद्वारा “मीना की दुनिया” “वीडियो क्लिप” काभरपूर आनंद उठाया। इसके साथ ही साथ “मीना की दुनिया”पर आधारित टेस्ट सीरीज -1 के रूप में प्रश्नों के लिखित उत्तर भी ग्रुप में शेयर किए गये। इसके साथ ही साथ उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से भी शिक्षक बहुत से प्रयास अपने स्तर पर कर रहे हैं। इसके साथ ही साथ शिक्षक मोबाइल पर कॉन्फ्रेंस कॉल और जूम ऐप के माध्यम से शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के प्रयास कर रहे हैं। इनके बारे में आने वाले दिनों में आपके साथ और जानकारी साझा करते हैं।

लॉक डाउन के दौरान शिक्षक खुद भी पढ़ रहे हैं किताबें

लॉक डाउन के दौरान मिलने वाले समय का इस्तेमाल शिक्षक साथी स्वाध्याय के लिए भी कर रहे हैं। सुरेंद्र पाल सिंह ने ट्वीट करके बताया कि वे आजकल गिजूभाई बधेका की पुस्तक दिवास्वपन पढ़ रहे हैं। इसके साथ ही साथ शिक्षक साथियों के बीच किताबों का लेन-देन और स्वाध्याय हो रहा है। कुछ शिक्षक साथियों ने गधे पर सवार पुस्तकालय किताब पढ़ी। यह किताब दूर-दराज के क्षेत्र में बच्चों के लिए लाइब्रेरी किताबें पहुंचाने के प्रयास के बारे में है। इस किताब के बारे में शिक्षक साथियों की राय थी, “बहुत ही बढ़िया पुस्तकें। प्राथमिक स्तर के बच्चों में पढ़ने के प्रति रुचि को जगाने में मददगार साबित होंगी।”

एक अन्य किताब छुटकी और चीरो के बारे में शिक्षक साथियों का कहना था, “बच्चों की रोचकता को ध्यान में रखकर, कहानी ,अत्यंत सरल शब्दों में लिखी गई है, जिसमें प्राकृतिक चित्रों का समावेश है । बचपन में यदि कोई डर बच्चों के मन में बैठ जाती है तो वह आजीवन बनी रहती है। एक शिक्षक के रूप में, हमें उन कारणों को ज्ञात कर दूर करने का प्रयास करना चाहिए।” इस किताब के साथ ही अन्य किताबें जैसे महाश्वेता देवी की लिखी किताब क्युँ-क्युँ लड़की और कमला भसीन की लिखी कविता उल्टी-सुल्टी मीतो किताबें ह्वाट्सऐप के माध्यम से शिक्षक साथियों के साथ साझा की गई हैं, जिसे वे पढ़ रहे हैं। अगर आप भी ऐसी किताबें व अन्य संसाधन का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो एजुकेशन मिरर को Whatsapp करें 9076578600 या मेल करें educationmirrors@gmail.com पर।

एक जरूरी जानकारी

कोरोना लॉकडाउन के दृष्टिगत बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों की शिक्षा के लिए मिशन प्रेरणा की ई- पाठशाला कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके अन्तर्गत दूरदर्शन और आकावाणी के माध्यम से बच्चों के लिए 18 अप्रैल से प्रतिदिन शैक्षणिक कार्यक्रम निम्न रूप से प्रसारित किया जाएगा।

1) DD(UP) पर प्रतिदिन अपराह्न 11.30 बजे से आधे घंटे का कार्यक्रम
2)आकाशवाणी के प्राइमरी चैनल MW 747 KHz पर प्रतिदिन अपराह्न 11.00 बजे कार्यक्रम जिसको News on Air ऐप पर भी सुना जा सकता है।

इसके साथ ही साथ आप एनसीईआरटी की ऑफिसियल यू-टयूब चैनल से भी होने वाली परिचर्चाओं में हिस्सा ले सकते हैं। पहले होने वाली चर्चाओं को देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

(आप एजुकेशन मिरर को फ़ेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर फ़ॉलो कर सकते हैं। वीडियो कंटेंट व स्टोरी के लिए एजुकेशन मिरर के यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें। शिक्षा से जुड़े कोई अन्य सवाल, सुझाव या लेख आपके पास हों तो जरूर साझा करें। हम उनको एजुकेशन मिरर पर प्रकाशित करेंगे ताकि अन्य शिक्षक साथी भी इससे लाभान्वित हो सकें।)

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Jai Shekhar

सामयिक व आवश्यक लेख, इस समय जब महामारी के कारण विद्यालय बंद हैं, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई में मदद करना कठिन तो है पर असम्भव नही।सब तक नही तो कुछ तक, कुछ2तक नही तो एक दो तक तो पहुँच बनाने का प्रयास करना चाहिए।
मुझे बहुत प्रसन्नता है कि मेरेप्रयास कुछ बच्चों और शिक्षकों तक पहुंचे और यह यात्रा बढ़ रही है।
इस मंच ने जो अन्य जानकारियां दी वह भी बहुत काम की हैं।

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