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कैसे हो आँगनबाड़ी में ‘स्कूल रेडिनेस’?

आँगनबाड़ी बच्चों के लिए पहली सीढ़ी होती है जहाँ वे औपचारिक माहौल में काम करना सीखते हैं। आँगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों को आना अच्छा लगे। वे खुश रहें और अन्य बच्चों के साथ दोस्ती करना सीखें। एक-दूसरे की परवाह करना सीखें और विभिन्न गतिविधियों में सक्रियता से शामिल हों ऐसे अवसर देने चाहिए। ताकि उनका सभी आयामों जैसे शारीरिक,भाषायी, सामाजिक-भावनात्मक, संज्ञानात्मक और रचनात्मक विकास सहजता के साथ संभव हो सके। यह बात एक सकारात्मक सीखने के माहौल में ही संभव है। 

निश्चित तौर पर ऐसा करने के लिए आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सतत क्षमतावर्धन और ऑन साइट सपोर्ट की जरूरत है ताकि वे कैलेंडर और अपने प्रदेश के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम का सहजता के साथ उपयोग कर सकें।

1. जिन बच्चों का नामांकन है, वे बच्चे आँगनबाड़ी केंद्र पर नियमित आने लगें।
2. आँगनबाड़ी केंद्र की रूटीन को बच्चे समझें और उनको एक भयमुक्त माहौल मिले।
3. बच्चे आँगनबाड़ी कार्यकर्ता के निर्देशों (स्थानीय भाषा में) को आसानी से समझ सकें। 
4. भाषायी विकास की गतिविधियों जैसे ‘मौखिक भाषा विकास’ में बच्चों की भागीदारी हो।
5. बच्चे केंद्र पर अकेले और समूह में अन्य बच्चों के साथ काम करना सीख सकें।

छोटे बच्चों में मौखिक भाषा विकास 

आँगनबाड़ी आने वाले बच्चे अपने घर से बातचीत की भाषा सीख कर आते हैं। वे अपने परिवेश की विभिन्न चीजों को आसानी से समझ पाते हैं। उसके बारे में बातचीत कर पाते हैं। ध्यान रहे कि यह भाषा बच्चों के घर की भाषा होती है, इसलिए बच्चों के साथ बातचीत करते हुए स्थानीय भाषा का उपयोग करना ज्यादा बेहतर है। क्योंकि बच्चे आपकी कही बात को समझ पाते हैं और जवाब देते हैं। कुछ बातों का ध्यान बच्चों के मौखिक विकास के लिए रखा जा सकता है जैसे –

  • किसी कहानी को पहले स्थानीय भाषा में सुनाना, फिर हिन्दी या अन्य भाषा में सुनाना 
  • लोकगीतों का उपयोग करना क्योंकि ये भाषायी संदर्भ में बच्चों के ज्यादा करीब होते हैं 
  • खेलगीतों का इस्तेमाल करना ताकि बच्चे भाषा के अर्थ को शारीरिक हाव-भाव व निर्देशों से पकड़ सकें। 
  • बच्चों को किसी गीत को समूह में मिलकर गाने और अकेले सुनाने का मौका दें 
  • बच्चों को आपस में बातचीत करने और समूह में मिलकर खेलने का मौका दें, यह भी बच्चों के भाषायी विकास को मजबूत बनाता है। 
  • किसी सुनी हुई कहानी को बच्चे अपने घर की भाषा में सुना सकें – कुछ पंक्तियां या पूरी कहानी – क्रम जैसा भी हो। इसे जरूर प्रोत्साहित करें। 
  • परिवेश से जुड़ी विभिन्न आवाजों की पहचान पर काम करें। 
  • विभिन्न वर्णों की पहली आवाज को पहचानने का काम गतविधियों के माध्यम से करें। इसके लिए सबसे ज्यादा परिचित शब्दों को चुनना बहुत मदद करता है। 
  • ऐसे चित्रों का संग्रह बनाना जिनसे बच्चे परिचित हों और इन चित्रों पर होने वाली चर्चा में बच्चों को शामिल करना।

(आप एजुकेशन मिरर को फ़ेसबुकएक्स और यूट्यूब पर फ़ॉलो कर सकते हैं। एजुकेशन मिरर के लिए अपने लेख भेजें educationmirrors@gmail.com पर।)

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