तालीम की रौशनीः ‘किताबें पढ़ने के शौक की वजह से ज़िंदा हूँ’ एक उपन्यास की नायिक कहती है, "मेरी ज़िंदगी में काम वही दो हर्फ़ आए, जो मौलवी साहब ने पढ़ा दिये थे। [...]