कक्षा अनुभव: जब एक बच्चे ने कहा, “काश ! मैं भी लड़की होता”
अरविन्द कुमार सिंह लिखते हैं कि यदि किसी कक्षा को कुछ दिन पढ़ाएंगे तो आपको स्वयं ही पता चल जाता है कि किस बच्चे को सीखने में कहाँ कठिनाई आ रही है। ऐसे में अलग से मूल्यांकन की आवश्यकता नहीं पड़ती है। [...]