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साल 2018 के आम बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए ‘डिजिटल बोर्ड’, एकलव्य स्कूल के अलावा और क्या है?

संसद में साल 2018 के लिए आम बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, “हमने बच्चों को स्कूल तक लाने में सफलता पाई है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हमारे लिए अभी भी चिंता का विषय है। हम शिक्षा को संपूर्ण तरीके से देखने का प्रस्ताव करते हैं। अब पूर्व-प्राथमिक से लेकर 12वीं तक की शिक्षा के लिए एक नीति होगी। हमें ब्लैकबोर्ड से डिजिटल बोर्ड की तरफ बढ़ना होगा।”

आम बजट की एक ख़ास बात है कि इस बार एजुकेशन सेस को 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया गया है। पहले 3 फीसदी वाले एजुकेशन सेस में 2 फीसदी प्राथमिक शिक्षा के लिए और 1 फीसदी सीनियर सेकेंडरी के लिए एजुकेशन सेस लगता था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण के दौरान कहा कि एजुकेशन सेस को 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी करने से टैक्स के रूप में 11 हजार करोड़ अतिरिक्त रुपये जमा किये जा सकेंगे।

नर्सरी से 12वीं तक के लिए एक शिक्षा नीति

delhi-school-2हाल ही में 22 जनवरी को एक प्रस्ताव इस संदर्भ में भेजा गया है, जिसमें सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को एक साथ शामिल करने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव को शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक अहम क़दम बताया जा रहा है, लेकिन इसको लेकर शिक्षाविदों द्वारा सवाल भी उठाये जा रहे हैं।

उनका कहना है कि अगर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को आपस में मिला दिया जायेगा तो बहुत हद तक संभव है कि् प्राथमिक शिक्षा को मिलने वाला महत्व और ध्यान में कमी आये। इसके साथ ही प्राथमिक शिक्षा के लिए आवंटित राशि के माध्यमिक शिक्षा के मद में खर्च होने की गुंजाइश बढ़ जायेगी, इसकी संभावना अभी तक नहीं थी क्योंकि दोनों योजनाओं के क्रियान्वयन और बजट का प्रावधान अलग-अलग है।

13 लाख अप्रशिक्षित शिक्षकों को मिलेगी ‘दीक्षा’

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 में शिक्षा की आधारभूत संरचना को बेहतर बनाने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है, “सभी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं हों,ताकि बच्चों के मन में बार-बार उनके लिए प्रश्न न उठें, और उनकी एकाग्रता में बाधा पहुंचे!”

पढ़िएः साल 2017 के बजट में शिक्षा क्षेत्र को क्या मिला?

इस मुद्दे पर ध्यान देने का प्रयास साल 2018 के आम बजट में दिखाई देता है। इस बार के आम बजट में स्कूलों की आधारभूत संरचना को बेहतर बनाने के लिए राईज (RISE – Revitalizing Infrastructure in School Education) योजना के तहत चार सालों के लिए 1 लाख करोड़ रूपये आवंटित किये गये हैं।

 

भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली

भारत के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश करते हुए शिक्षा में गुणवत्ता को प्राथमिकता देनी की बात कही।

इस बजट में शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दीक्षा (Diksha) नाम के एक नये कार्यक्रम की घोषणा की है, इसके तहत 13 लाख अप्रशिक्षित शिक्षकों को औपचारिक प्रशिक्षण मिल सकेगा। इसके साथ ही बीएड का एक समन्वित कार्यक्रम की शुरूआत की जायेगी।

आदिवासी बहुत क्षेत्रों में नवोदय जैसे ‘एकलव्य स्कूल’

साल 2018 के आम बजट में शिक्षा की घोषणाओं में आदिवासी क्षेत्रों के लिए एकलव्य स्कूल खोलना शामिल हैं। इसके तहत  साल 2022 तक आदिवासी बहुल क्षेत्रों के प्रत्येक ब्लॉक में नवोदय की तरह एकलव्य स्कूल बनेंगे। जिन ब्लॉक में 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी आदिवासी समुदाय की है, वहां पर ऐसे स्कूल बनेंगे।

पढ़िएः उत्तर प्रदेश के स्कूलों में आईसीटी के माध्यम से शिक्षण को रोचक बनाते शिक्षक

स्कूलों में ‘ब्लैक बोर्ड’ की जगह लेंगे ‘डिज़िटल बोर्ड’

अर्ली लिट्रेसी, एजुकेशन मिरर, सरकारी बनाम निजी स्कूल, पठन कौशल का विकास, पढ़ना कैसे सिखाएं

DW हिंदी की वेबसाइट पर 22 फरवरी 2017 को प्रकाशित एक खबर की शीर्षक है, स्कूल में लैपटॉप ने ली किताबों की जगह। इसमें कहा गया है कि “डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के एक स्कूल में किताबों की जगह लैपटॉप ने ले ली है। इस स्कूल में डिजिटल तरीके से पढ़ाने पर जोर है, इसीलिए हर छात्र के पास यहां लैपटॉप है।” आज के आम बजट में ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई। भारत में भी लैपटॉप की जगह किताबें ले लें, वे दिन अभी दूर हैं। मगर सरकार ने ‘डिजिटल शिक्षा‘ के लिए अपनी प्रतिबद्धता फिर से दोहराते हुए कम से कम ब्लैक बोर्ड यानि श्याम पट की जगह डिज़िटल बोर्ड को देने के एक महत्वाकांक्षी पहल की बुनियाद रख दी है।  

अगर स्कूलों की ज़मीनी स्थिति को ग़ौर से देखा जाये तो हमारे देश में बहुत से सरकारी और निजी स्कूल ऐसे भी हैं जिनके ब्लैक बोर्ड खुरदुरे और काले-सफेद दोनों के मिश्रित रंग वाले नज़र आते हैं। इनको भी बेहतर बनाने का प्रयास ब्लॉक स्तर पर करने की जरूरत है, ताकि उनकी पर लिखी इबारत कतार के आखिर में बैठे बच्चों को साफ़-साफ़ नजर आये।

इस साल के आम बजट में  हर साल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले एक हजार प्रतिभाशाली छात्रों को प्रधानमंत्री फेलोशिप दी जायेगी। इसको भी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है।

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