जानिए शिक्षा क्षेत्र के लिए कैसा रहा 2024 और 2025 की भावी संभावनाएं?

शिक्षा के क्षेत्र में 2020 के बाद के वर्षों में नीतिगत बदलाव के साल के रूप में रेखांकित किये जाते हैं। इन्हीं वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 बनी और इसके क्रियान्वयन की शुरुआत हुई। इसके तहत मातृभाषा में शिक्षण को नीतिगत स्तर पर स्वीकार किया गया। इसके कारण बहुभाषी राज्यों में इस दिशा में मातृभाषा में बाल साहित्य का विकास करने, शिक्षण सामग्री व टीएलएम के विकास को लेकर काफी महत्वपूर्ण काम की शुरुआत 2024 में हुई है। आने वाले वर्षों में इसका असर देखने को मिलेगा।
प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा को मिलती रहेगी प्राथमिकता
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारत में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को लेकर काम करने की जरूरत को एक बड़े लक्ष्य के रूप में रेखांकित करती है। इसका असर नीतिगत दस्तावेजों के साथ-साथ ज़मीनी स्तर पर आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और तैयारी के रूप में दिखाई दे रहा है। अगर भारत के संदर्भ में देखें तो आँगनबाड़ी केंद्रों की पहुंच बहुत व्यापक है और आँगनबाड़ी केंद्रों पर काम करने वाली कार्यकर्ता और सहायिकाओं के ऊपर काम की बड़ी जिम्मेदारी भी है, लेकिन उनका ध्यान शिक्षा वाले पहलू पर भी शिफ्ट होगा रहा है।
इसके कारण आँगनबाड़ी कार्यकर्ता को ‘आँगनबाड़ी शिक्षिका’ की सक्रिय भूमिका में आने की अपेक्षा भी प्रशासनिक और जमीनी स्तर पर बढ़ी है। वहीं आँगनबाड़ी केंद्रों का विद्यालय में शिफ्ट होना एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। तो कहीं-कहीं पर विद्यालयों में बालवाटिका की शुरुआत के कारण नर्सरी टीचर्स की नियुक्ति हुई है और वहाँ पर बच्चों के नामांकन में गौर करने वाली वृद्धि हुई है। यहाँ एक और गौर करने वाली बात है कि आँगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के नामांकन पर विपरीत असर भी पड़ा है। कुछ केंद्र तो बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं, ऐसी स्थितियां भी बन रही हैं।
FLN का लक्ष्य बना रहेगा महत्वपूर्ण
शिक्षकों के प्रशिक्षण में हाल के वर्षों में एफएलएन यानि भाषा और गणित में बुनियादी दक्षताओं को हासिल कराने वाली तैयारी पर काफी जोर था, जो आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगा। निपुण भारत मिशन में बालवाटिका से लेकर तीसरी कक्षा तक अपेक्षित दक्षताओं को हासिल करने वाले लक्ष्यों का भी फैसला आने वाले वर्ष 2026 में होना है, उसके पूर्व का वर्ष 2025 इस नजरिये से महत्वपूर्ण है। यहाँ गौर करने वाली बात है कि जमीनी स्तर के अनुभव बताते हैं कि बहुत से विद्यालयों में आज भी तीसरी से पाँचवीं कक्षा के बहुत से बच्चे भाषा की किताब को समझ के साथ पढ़ने और उससे जुड़े सवालों का जवाब देने में अपनी कक्षा स्तर की दक्षता से पीछे हैं। इस कारण से बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता पर काम की आवश्यकता वर्तमान वर्ष में भी जारी रहेगी।
हाल के वर्षों में कोविड-19 की परिस्थिति के बाद सामाजिक भावनात्मक विकास को लेकर काम करने की जरूरत को विद्यालयी शिक्षा में एक जरूरत के रूप में स्थान मिला है, इसको लेकर होने वाले काम की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि स्केल बनी-बनाई सामग्री साझा करने और प्रशिक्षण में इससे जुड़े मुद्दों को शामिल करने की दिशा में प्रयास तो पहले से हो रहे हैं।
2025 में दिखेगा ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ के खत्म होने का असर
‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ का खत्म होना भी 2024 में शिक्षा के क्षेत्र में घटित होने वाली बड़ी घटनाओं में से एक है। इसका व्यापक असर सीधे तौर पर बच्चों और उनके अभिभावकों को प्रभावित करेगा। क्योंकि इसमें 5वीं व 8वीं की परीश्रा में पास न होने वाले छात्र-छात्राओं को किसी कक्षा विशेष में रोकने वाले प्रावधान को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है। बच्चों पर परीक्षा का स्वाभाविक थोड़ा सा दबाव स्वाभाविक रूप से आयेगा और अभिभावकों को भी अपने नजरिये को बदलने की दिशा में सोचने के लिए मजबूर करेगा क्योंकि अब अगली कक्षा में प्रमोट होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं होगी। हालांकि इसके क्रियान्वयन पर काफी कुछ निर्भर करता है। चूंकि भारत में शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है इसलिए यह असर बहुत हद तक राज्य सरकारों के फैसले पर निर्भर करता है। खैर अभी का दौर तो इसके पक्ष और विपक्ष में लेख लिखने और चर्चा व विमर्श का है जो सतत जारी है।
शिक्षा क्षेत्र में 2025 की शेष संभावनाओं पर आने वाले दिनों में चर्चा सतत जारी रहेगी। इसमें रिसर्च के लिए होने वाले प्रवेश को केवल NET परीक्षा के आधार पर करने, चार वर्षीय ग्रेजुएशन को तीन वर्ष में पूरा करने का अवसर देने, दो वर्षीय बीएड तो मास्टर्स के लिए एक वर्षीय बनाने जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। इसके साथ ही साथ जिन विद्यालयों को पीएमश्री स्कूल का दर्जा दिया गया है, उनको किस तरह का सहयोग दिया जा रहा है और आने वाले दिनों में इसका क्या असर होगा 2025 के प्रमुख मुद्दों में यह बात भी शामिल है। शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन का पाँचवां वर्ष है 2025 इस नजरिए से भी इस वर्ष में होने वाला बदलाव पर लोगों की नजरे होंगी।
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