भाषा शिक्षण: बच्चों को बातचीत के अवसर देना क्यों जरूरी है?

कक्षा-कक्ष केवल एक ऐसा स्थान नहीं है जहाँ शिक्षक पढ़ाते हैं और बच्चे सीखते हैं। यह दो-तरफा संवाद,अनुभव और मिलकर साझे अर्थ निर्माण का एक जीवंत केंद्र होता है। बातचीत के माध्यम से सीखने बच्चों के जीवन का अभिन्न हिस्सा होता है। जब बच्चे खेल रहे होते हैं या कोई काम कर रहे होते हैं तो उसमें संवाद की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हम बातचीत के महत्व को निम्न बिन्दुओं के रूप में समझ सकते हैं।
बातचीत केवल संवाद नहीं, सोचने की प्रक्रिया भी है
बच्चों की बातें केवल भाषा का अभ्यास नहीं होतीं, वे उनके सोचने, काम करने,महसूस करने और सीखने की प्रक्रिया को दर्शाती हैं। अगर हम बच्चों की बातों को ध्यान से सुनें तो उनकी बातों से यह समझ सकते हैं कि वे किसी विषय को किस तरह देख, समझ और समझा रहे हैं।
शिक्षक की भूमिका: सुनना,समझना और शामिल होना
कालांश में हमें केवल जवाब देने वाला व्यक्ति नहीं होना चाहिए। हमारी भूमिका बच्चों की बातों को ध्यान से सुनकर उन्हें आगे बढ़ाने में मदद करने वाली होनी चाहिए।
संदर्भ और बच्चों के अनुभवों का महत्व
बच्चों की बातचीत उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यक्तिगत अनुभवों से जुड़ी होती है। एक ही प्रश्न या गतिविधि पर बच्चों की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग हो सकती हैं, जो उनके भिन्न अनुभवों और समझ को दर्शाती हैं। इन विभिन्न अनुभवों और विचारों को कक्षा-कक्षा में आमंत्रित करना जरूरी है। ताकि सभी विद्यार्थियों को अपनी वर्तमान समझ से आगे बढ़ाने और नये विचारों के लिए खुद को तैयार करने में मदद मिलती है।
कक्षा-कक्ष में पाठ्यक्रम बच्चों तक कैसे पहुंच रहा है
बातचीत का विश्लेषण करके शिक्षक यह समझ सकते हैं कि पाठ्यक्रम की अवधारणाएँ बच्चों तक कैसे पहुँच रही हैं। इससे यह भी पता चलता है कि बच्चे किस तरह पाठ्यपुस्तकों से परे जाकर अपनी समझ बना रहे हैं। या फिर केवल पाठ्यपुस्तक में दी गई विषयवस्तु ही बच्चों के समझ का आधार बन रही है। इस बात को समझना एक शिक्षक को अपनी बेहतर प्लानिंग व शिक्षण की योजना बनाने में मदद कर सकता है।
बातचीत भी मूल्यांकन का एक उपयोगी तरीका है
जब शिक्षक बच्चों की बातचीत को ध्यान से सुनते हैं तो यह एक वैकल्पिक मूल्यांकन बन जाता है। इससे बच्चों के सोचने के तरीके, सवाल बनाने की क्षमता, सवालों के जवाब देने की क्षमता और सीखने की तैयारी को समझा जा सकता है।
बात को प्रोत्साहित करना क्यों जरूरी है
- बच्चों की बातचीत केवल कक्षा-कक्ष का शोर नहीं होती, उसमें बहुत सी अर्थपूर्ण बातें होती हैं।
- बच्चे बातचीत के माध्यम से भी सीखते हैं।
- कक्षा में संवाद दो-तरफ़ा संवाद होना चाहिए।
- चर्चा के दौरान बच्चों के अनुभवों और विचारों को बातचीत के दौरान शामिल करना जरूरी है।
- शिक्षकों के लिए बच्चों को सुनना एक वैकल्पिक मूल्यांकन की तरह काम करता है।
- एक ही घटना के कई अर्थ हो सकते हैं – यह विविधता को समझना आवश्यक है।
(एजुकेशन मिरर से फ़ेसबुक, एक्स और यूट्यूब के जरिए भी जुड़ सकते हैं। बच्चों की लिखी सामग्री और उनके बनाये चित्र, अपने मौलिक लेख, पसंदीदा विषय पर कक्षा-शिक्षण के अनुभव और विचार साझा कर सकते हैं educationmirrors@gmail.com पर।)
I agree with that we should provide them ample opportunity to speak in the classroom because is show the environment of his home , peer group and what he/ she is feeling about the society.
It helps us to plan accordingly and assess them as well.
Thank you sharing original post.🙏🏼
भाषाई कौशलों को जाने बिना भाषा समृद्ध नहीं हो सकती , और बाल मन को जाने बिना बाल विकास नहीं हो सकता । सटीक , सरल लेख यह स्पष्ट कर रहा है । भाषाई कौशल भाषा शिक्षक के लिए महत्त्व पूर्ण है अपने भाषा ज्ञान को समृद्ध करने में ।👌👌