स्कूल और कॉलेजः परीक्षाओं का डर आख़िर कब तक?
आख़िर कब तक हमारे स्कूल, क़ॉलेज और विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं का डर कायम रहेगा? यह सवाल 21वीं सदी में और ज़्यादा प्रासंगिक हो गया है।
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आख़िर कब तक हमारे स्कूल, क़ॉलेज और विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं का डर कायम रहेगा? यह सवाल 21वीं सदी में और ज़्यादा प्रासंगिक हो गया है।
शिक्षा का अधिकार क़ानून लागू होने के बाद से शिक्षाविदों द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता का सवाल प्राथमिकता से उठाया गया। उनका कहना था कि सरकारी स्कूल में बच्चों का आना सुनिश्चित करना और उपस्थिति सुनिश्चित करना ही पर्याप्त नहीं है। अगर बच्चे स्कूल आ रहे हैं तो यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि बच्चे सीख रहे हैं ।