अपनी तो पाठशाला, मस्ती की पाठशाला !!
एनसीएफ-2005 में कल्पना की गई है कि स्कूल हर बच्चे के लिए मस्ती की पाठशाला बने. बच्चा सीखने की प्रक्रिया में आनंद और ख़ुशी से रिश्ता बना रहे.
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एनसीएफ-2005 में कल्पना की गई है कि स्कूल हर बच्चे के लिए मस्ती की पाठशाला बने. बच्चा सीखने की प्रक्रिया में आनंद और ख़ुशी से रिश्ता बना रहे.