Trending

कैसे होगी पढ़ाई, 200 बच्चे और दो शिक्षक

बच्चे, पढ़ना सीखना, बच्चे का शब्द भण्डार कैसे बनता हैकिसी भी स्कूल में बच्चों के अनुपात में शिक्षक होने चाहिए। सरकारी स्कूलों के संदर्भ में भी यह बात लागू होती है। मगर सरकारी स्कूलों की ज़मीनी स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है।

छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 का है। मगर बहुत से स्कूल ऐसे हैं जो सिंगल टीचर स्कूल हैं। यानि पूरे स्कूल के लिए, सभी विषय पढ़ाने के लिए। स्कूल में खाना बनवाने के लिए और स्कूल से जुड़ी डाक भेजने के लिए। सत्र के आखिर में और बीच नें विभिन्न प्रशिक्षणों में हिस्सा लेने के लिए मात्र एक ही शिक्षक हैं।

तीन स्थितियां

  1. एक सरकारी स्कूल में 32 बच्चे हैं और वहां दो शिक्षक हैं।
  2. एक अन्य स्कूल में 132 बच्चों का नामांकन है और वहां दो शिक्षक हैं।
  3. एक अन्य स्कूल में 250 से ज्यादा बच्चों का नामांकन है और उस स्कूल में मात्र दो शिक्षक हैं। इनमें से एक खुद प्रधानाध्यापक हैं।

क्या उपरोक्त स्थिति में शिक्षण का कार्य सामान्य ढंग से संचालित हो पाएगा? क्या इन स्कूलों में शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात का संतुलन बन रहा है। पहली स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात की स्थिति ठीक है, मगर क्या उस स्कूल में बच्चों के सीखने का स्तर अच्छा होगा, इस बात की गारण्टी है। अगर नहीं तो इन सवालों के बारे में सोचने का समय है कि सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति क्या है? क्योंकि जमीनी स्थिति से ही इस बात का निर्धारण होना है कि सरकारी स्कूलों का भविष्य क्या होगा?

आप सौभाग्यशाली हैं अगर आठवीं तक के किसी सरकारी स्कूल में आपको आठ-नौ शिक्षकों का स्टाफ दिखाई देता है। या फिर किसी प्राथमिक स्कूल में चार-पांच शिक्षकों का स्टाफ है। मुझे ऐसे स्कूलों में जाने का मौका मिला जहां पर 250 बच्चे हैं, मगर दो ही शिक्षक मौजूद हैं।

बहुत से ऐसे शिक्षकों से भेंट हुई जो सिंगल टीचर स्कूल में पढ़ाते हैं और साफ-साफ स्वीकार करते हैं कि स्कूलों में डाक का काम इतना बढ़ गया है कि उसको करते हुए सुचारु रूप से पढ़ाई करा पाना संभव नहीं है। मल्टीग्रेड टीचिंग की ट्रेनिंग शिक्षकों को मिली हुई है, वे चीज़ों को मैनेज करना जानते हैं शिक्षा से जुड़े अधिकारी यह बात कहते हैं।

200 बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे दो शिक्षक

150-200 बच्चों को दो शिक्षक कैसे संभालेंगे जब स्कूल में नियमित पढ़ाई के साथ-साथ रोजाना मिड डे मील बनाने, स्कूल से जुड़ी ढेर सारी सूचनाएं पहुंचाने, स्कूल की व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मसलों का समाधान करने की जिम्मेदारी शिक्षकों के ऊपर होती है। बच्चों को दवाइयां देनी हों या फिर किसी अन्य सरकारी योजना को लागू करना हो, जिम्मेदारी भी शिक्षकों के ऊपर ही होती है।

कभी-कभी ऐसा भी होता है या होता होगा कि सिंगल टीचर वाले स्कूल को छुट्टी पर जाना हो, ऐसे में किसी अन्य स्कूल से शिक्षकों को वहां डेपुटेशन पर लगाया जाता है। इससे उस स्कूल में बच्चों की पढ़ाई होती है, जिस स्कूल से स्कूल को उस स्कूल में लगाया गया है। उस स्कूल में पढ़ाई पर तो असर पड़ता ही है जहां के शिक्षक छुट्टी पर या ट्रेनिंग पर गए हुए हैं। क्योंकि जिस शिक्षक को उस स्कूल में तैनात किया गया है, वास्तव में उनकी ऐसी कोई ट्रेनिंग है ही नहीं कि कई साल के बच्चों को एक साथ बैठाकर कैसे पढ़ाया जाए?

पास कर देने का मतलब न पढ़ाना तो नहीं है

दरअसल यह स्थिति शिक्षा के बजट में कटौती वाले फॉर्मूले के तहत भारत की शिक्षा व्यवस्था में अपनाई गई थी। यह विचार ज़मीनी स्तर पर एक आस्था का रूप ले चुका है कि सरकार नहीं चाहती कि बच्चों की पढ़ाई अच्छी हो। बस उनको बच्चों को जैसे-तैसे पढ़ाना है और आगे बढ़ाना है। आठवीं तक फेल न करने वाली नीति का भी जमीनी स्तर पर संदेश यही गया कि सभी बच्चों को पास कर देना है। वे पढ़ाई करें या न करें। स्कूल में आए या न आए।

अगर कोई बच्चा परीक्षा में बैठता है तो उसे पास करना ही है। ऐसे बहुत से छात्रों ने इस साल आठवीं की परीक्षा पास की है जिनको किताब पढ़ना भी नहीं आता। सवालों का जवाब लिखना तो दूर की बात है। ऐसे बच्चे आगे जाकर नौवीं में फेल होंगे और उनके सामने एक ही रास्ता होगी कि पढ़ाई छोड़कर घर पर बैठना। या फिर रोजगार के अवसरों की तलाश करना।

यहां एक बात ग़ौर करने वाली है कि आठवीं तक बच्चों को फेल न करने वाली नीति के कारण बच्चे नौवीं-दसवीं में फेल हो रहे हैं, ऐसा नहीं है। इसके पहले भी ऐसे बच्चों की संख्या काफी ज्यादा थी। आठवीं तक बच्चों को फेल न करने वाली नीति को बदलने और पांचवीं कक्षा तक सीमित करने की बात हो रही है। पर इस नीति में बदलाव से क्या होगा? अगर स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक ही नहीं हैं या फिर जो शिक्षक मौजूद हैं वे पढ़ाई के अतिरिक्त अन्य कार्यों में व्यस्त हैं और बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x