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रविवार, 18 अक्टूबर 2026

शिक्षा का लक्ष्य सृजनशील मनुष्य का निर्माण हैः जीन पियाजे

आज सबसे बड़ा खतरा नारेबाजी, सामूहिक विचार और तुरंत तैयार विचारों से है, हमें व्यक्तिगत रूप से इनका सामना करना है।

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जीन पियाजे ने शिक्षा के उद्देश्य के बारे में अपने विचार रखते हुए लिखा था, “शिक्षा का सबसे प्रमुख कार्य ऐसे मनुष्य का सृजन करना है जो नये कार्य करने में सक्षम हो, न कि अन्य पीढ़ियो के कामों की आवृत्ति करना। शिक्षा से सृजन, खोज और आविष्कार करने वाले व्यक्ति का निर्माण होना चाहिए।”

इसके बाद आने वाली पंक्तियां हैं, “शिक्षा का दूसरा कार्य ऐसे मस्तिष्क की रचना है जो आलोचना कर सके, तथ्यों का सत्यापन कर सके और जो कुछ कहा जाये उसे आँख मूंदकर स्वीकार न करे।”

यह पंक्तियां तो वर्तमान में बेहद प्रासंगिक प्रतीत होती हैं, “आज सबसे बड़ा खतरा नारेबाजी, सामूहिक विचार और तुरंत तैयार विचारों से है, हमें व्यक्तिगत रूप से इनका सामना करना है। साथ ही इसकी आलोचना करना और सत्य-असत्य में भेद करना भी अपेक्षित है।

मनोविज्ञान के क्षेत्र में जीन पियाजे को ‘संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत’ देने के लिए जाना जाता है।

(साभारः एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘भारत में विद्यालयी शिक्षाः वर्तमान स्थिति और भावी आवश्यकताएं’)

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