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भारत में कितने सिंगल टीचर स्कूल हैं?

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भारत में एक लाख से ज्यादा एकल विद्यालय हैं।

भारत में स्कूली शिक्षा की स्थिति क्या है? इसे समझने के लिए छात्र-शिक्षक अनुपात को एक आधार के रूप में स्वीकार किया जाता है। शिक्षा का अधिकार कानून के मुताबिक आदर्श रूप में छात्र-शिक्षक अनुपात 30 से 35 के बीच में होना चाहिए।

मगर भारत के विभिन्न राज्यों में ऐसे स्कूल हैं जो एक शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे स्कूलों को सिंगल टीचर स्कूल भी कहते हैं।

एक शिक्षक बताते हैं कि झारखंड में शिक्षकों की संख्या काफी कम है। वहां पर बहुत से स्कूल एकल शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं, ऐसे स्कूलों में काम करने वाले शिक्षक भी किसी अन्य स्कूल से प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए हैं। यानि बहुत से स्कूल तो बग़ैर किसी स्थायी शिक्षक के ही संचालित हो रहे हैं।

विभिन्न राज्यों की स्थिति क्या है?

आँकड़ों के मुताबिक़ सबसे ज्यादा एकल शिक्षक वाले विद्यालय मध्य प्रदेश में हैं। मध्य प्रदेश के 17, 874 स्कूलों में मात्र एक शिक्षक हैं।

उत्तर प्रदेश इस मामले में दूसरे स्थान पर है। यहां पर 17,602 (उत्तर प्रदेश) विद्यालयों में मात्र एक शिक्षक हैं।

तीसरे स्थान पर राजस्थान है। यहां 13,575 (राजस्थान) स्कूल एकल शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं।

वहीं आंध्र प्रदेश में एकल विद्यालयों की संख्या 9,540 (आंध्र प्रदेश) है।

जबकि झारखण्ड में एक शिक्षकों के भरोसे चलने वाले विद्यालयों की संख्या 7,391 (झारखण्ड) है।

अगर हम पूरे भारत में एकल विद्यालयों की संख्या पर ग़ौर फरमाएं तो यह संख्या 1,05,630 है। यानि पूरे भारत में एक लाख से ज्यादा सिंगल टीचर स्कूल हैं। यह आँकड़ा संसद के पटल पर पेश किया गया। इसलिए आँकड़ों की विश्वसनीयत पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है।

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