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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

कहानीः स्वर्ग से सोने के सिक्के

इस पोस्ट में पढ़िए चंदा की लिखी एक छोटी सी कहानी। चंदा कक्षा पांचवीं में पढ़ती हैं।

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बच्चों के रचनात्मक लेखन को प्रोत्साहित करना और प्रकाशित करना बच्चों के भीतर के रचनाकार को निखरने का अवसर देना है। एजुकेशन मिरर का इस बात में गहरा विश्वास है कि बच्चों के प्रयासों को हमें प्रोत्साहित करना चाहिए। उनकी हर रचना को बतौर चित्रकार और लेखक पहचान देने की जरूरत है। क्योंकि हमारे विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे आगामी भविष्य के लेखक, साहित्यकार, कलाकार और वास्तविक रचनाकार हैं। इसी कड़ी में बच्चों द्वारा लिखी कहानियों की शृंखला में पहली स्टोरी पढ़िए कुमारी चंदा की कलम से। आप पाँचवीं कक्षा में पढ़ती हैं। प्राथमिक शाल बढ़नी झरिया, अंबिकापुर में। आपकी इस कहानी का नाम है ‘स्वर्ग से सोने के सिक्के’

pic-2एक बार एक छोटी लड़की थी वह हाथ में सिर्फ एक रोटी का टुकड़ा लेकर घर से चली । उसने सड़क के किनारे एक बढ़े व्यक्ति को देखा , वह बुढ़ा बोला मुझे कुछ खाने को दो , लड़की ने उसे रोटी टुकड़ा दे दिया । फिर से उसने लड़की से कहा कि मुझे ओढ़ने के कुछ दो और उसने लड़की से प्रार्थना की । लड़की ने अपनी शाल निकालकर उसे दे दिया । वह थोड़ा और आगे बढ़ी, एक बच्चा ठंड से काँप रहा था….।

 

 

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