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लेखक, बच्चे और लाइब्रेरियन में से किसे साहित्य की विधाओं की कैसी समझ होनी चाहिए और क्यों?

DSCN2473पुस्तकालय एक ऐसा चौराहा है जहाँ लेखकों का बच्चों से लेखन के माध्यम से संवाद होता है, लाइब्रेरियन लेखकों के लेखन से बने संग्रह और बच्चों के बीच शुरुआती स्तर पर एक सेतु बनाने का काम करते हैं। सेतु बनाने की प्रक्रिया में लाइब्रेरियन यह ध्यान रखता है कि बच्चे इस पुल को स्वतः पार कर सकें और बाद में नये उपलब्ध संसाधनों तक खुद पहुंचने का रास्ता बनाने की क्षमता भी खुद में विकसित कर सकें। इस तरीके का एक त्रिकोण किसी लाइब्रेरी में साहित्य की विधाओं के संदर्भ में लेखक, लाइब्रेरियन और बच्चों के बीच दिखाई देता है।

साहित्य की विधाओं का रिश्ता विविधता से भी है

साहित्य की विधाओं का सीधा रिश्ता संग्रह की विविधता से है। संग्रह की विविधता से आशय कविता, कहानी, नाटक, लोककथा, लोकगीत और साहित्य के अन्य रूपों जैसे कथेतर जीवनी, आत्मकथा, पत्र, यात्रा वृत्तांत व पत्रिकाओं के विविध रूपों से परिचय का है। एक जीवंत लाइब्रेरी की पहचान वहाँ मौजूद संग्रह की विविधता और बच्चों द्वारा पढ़ी जाने वाली और पसंद की जाने वाली किताबों की विविधता से भी होती है। लेखक, बच्चे और लाइब्रेरियन तीनों को साहित्य की विधाओं की समझ होनी चाहिए या नहीं? इस सवाल का जवाब आमतौर पर हाँ ही होगा। लेकिन कैसी समझ होनी चाहिए, यह तीनों की बुनियादी भूमिका और लाइब्रेरी के संदर्भ में भागीदारी से तय होने वाला सवाल है। इस विश्लेषण है लेखक, बच्चों और लाइब्रेरियन के संदर्भ में क्रमबद्ध तरीके से करेंगे।

लेखकः लेखक की भूमिका साहित्य सृजन की है। उसे साहित्य की विधाओं की अत्यंत गहरी समझ होनी चाहिए, क्योंकि उसे विधाओं के अनुशासन का निर्वाह भी करना है और विधाओं के अनुशासन का अतिक्रमण करके नई विधाओं का सृजन करना भी होता है। लेखक का अपनी पसंद की विधा पर पकड़ होना और उस विधा में होने वाले सृजन कर्म से अवगत रहना होता है ताकि वह कुछ नया सृजन कर सके। कुछ नया रचने की अपनी रचनाधर्मी भूमिका का निर्वाह भी कर सके। एक लेखक को समसामयिक समाज में बच्चों द्वारा पसंद किये जाने वाले साहित्य की विधाओं और ऐसी विधाओं की भी समझ होनी चाहिए, जिनकी बच्चों तक पहुंच नहीं हो पा रही है।

लाइब्रेरियनः लाइब्रेरियन को साहित्य की विभिन्न विधाओं की अच्छी समझ होनी चाहिए ताकि वे लाइब्रेरी में संग्रह की विविधता को बनाये रख सकें और साथ ही साथ बच्चों को साहित्य की विविध विधाओं से परिचित करा सकें। इसके साथ ही साथ साहित्य की विविध विधाओं से बच्चों को जोड़ भी सकें। उदाहरण के तौर पर अगर कोई लाइब्रेरियन अपने पुस्तकालय में केवल कहानी की किताबों का इस्तेमाल रीड अलाउड के लिए करता है तो फिर बच्चों का रुझान केवल कहानियों में होगा, इस बात की संभावना बढ़ जायेगी। लेकिन अगर किसी लाइब्रेरियन की रुचि कविताओं के साथ-साथ नाटक में भी है तो बच्चों की रुचि कविता व नाटक विधा में बढने के मौके बढ़ जाएंगे। अगर कोई लाइब्रेरियन अपने बच्चों को कविता, कहानी, नाटक, रोल प्ले, आत्मकथा, जीवनी, पत्र, संस्मरण, यात्रा वृत्तांत, निवंध, डायरी और विभिन्न रिपोर्ट्स से परिचित कराने का काम करते हैं तो ऐसी लाइब्रेरी में बच्चों की रुचि का दायरा व्यापक होगा और उनकी माँग में भी एक विविधता व विशिष्टता नज़र आयेगी जो शायद अन्य स्थानों पर संभव नहीं होगी।

बच्चेः बच्चों के लिए साहित्य की विविध विधाओं को समझना एक खिड़की खोलने का काम करेगा। वे कहानी, कविता, नाटक, जीवनी, पत्र, यात्रा वृत्तांत, डायरी, लोककथा, लोकगीत, निबंध, गीत इत्यादि भांति-भांति की विविध सामग्री से परिचित होंगे तो उनके सामने विकल्प बढ़ जाएंगे। विकल्पों की मौजूदगी पसंद में विविधता का निर्माण करेगी। इससे अलग-अलग समय पर अलग-अलग तरह की सामग्री को पढ़ने वाली स्थिति में एक ज्यादा बेहतर स्थिति पैदा होगी। बच्चों को अपनी लाइब्रेरी का विश्लेषण करने का एक आधार मिलेगा कि हमारी लाइब्रेरी में किस विधा की किताबें बहुत कम हैं।

उदाहरण के तौर पर सरकारी विद्यालयों में कविताओं की किताबों का संग्रह कथा साहित्य के मुकाबले अपेक्षाकृत कम होता है। इस बात को बच्चों ने भी किताबों को अलग-अलग कैटेगरी में बाँटकर लगाने के दौरान देखा और महसूस किया है। कविताओं से भी कम किताबें नाटकों की मिलती हैं। लोककथाओं की संख्या भी कथा साहित्य के मुकाबले कम होती है। इस तरह की समझ बच्चों में होना चुनाव के अवसरों और चुनाव की सीमाओं को एक बच्चे के सामने स्पष्ट करने वाली होगी। बच्चों को इसकी अच्छी समझ होनी चाहिए ताकि वे अलग-अलग तरह के साहित्य के परिचित हों और स्वतंत्र रूप से किताबों का चुनाव करने की क्षमता विकसित कर सकें।

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1 Comment on लेखक, बच्चे और लाइब्रेरियन में से किसे साहित्य की विधाओं की कैसी समझ होनी चाहिए और क्यों?

  1. आपके द्वारा इस प्रकार की जानकारी जो साहित्य के बारे मे है वो सभी के लिय हितकारी है जो सभी के लिए उपयोगी हो सभी के हित मे हो वही साहित्य है |
    आपसे मेरा अनुरोश है कि मुझे और भी साहित्य के प्रति समझ बने इसके लिए जो आपकी वेवसाइड है उसकी लिंक मुझे हो सके तो मेरे ईमेल id पे भेजने का प्रयास करें |
    neerajksg3@gmail.com

    मैं पिछले 3 वर्षो से ITE education प्रोग्राम & लाइब्रेरी सम्बंधिक कार्यो मे बच्चो के साथ मिल कर कार्य कर रहा हूँ |
    UP बहराइच में |

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