Trending

लाइब्रेरी में लगातार प्रयास से संभव हैं 15 सकारात्मक बदलाव

20190426_142411255318242474259775.jpgलाइब्रेरी को व्यवस्थित करने और सजाने में समय लगता है। इस तैयारी के बाद अगर हम बच्चों के साथ कुछ गतिविधियां करते हैं और बच्चों को खुद से किताबें पढ़ने का भी मौका देते हैं तो उसके सकारात्मक असर कुछ समय बाद दिखने शुरू हो जाते हैं। लाइब्रेरी में दिखने वाले बदलाव इस प्रकार होंगे –

  1. बच्चे पढ़ी व सुनी हुई कहानियों की किताबों के नाम बता सकेंगे।
  2. बच्चे पढ़ी हुई किताबों के बारे में बच्चे अन्य बच्चों को भी बताएंगे और उनके बारे में बात करेंगे।
  3. अगर कोई किताब बच्चों को बहुत ज्यादा पसंद आई तो उस किताब को पढ़ने के लिए अन्य बच्चों को भी कहेंगे।
  4. बच्चे पढ़ी हुई किताब की कहानी-कविता को अपने शब्दों में सुना और शेयर कर सकेंगे।
  5. बच्चे कहानियों को सुनने का आनंद लेंगे, धैर्य के साथ कक्षा-कक्ष में बैठने की आदत विकसित होगी। चर्चाओं के दौरान चिंतन करने और सोचकर जवाब देने की क्षमता भी विकास होगा।
  6. समूह में चिंतन की क्षमता का विकास कालांश में होने वाली चर्चाओं के दौरान होगा। चर्चा के माध्यम से किसी सामूहिक सहमति पर पहुंचने का कौशल भी बच्चों में विकसित होगा।
  7. लाइब्रेरी कालांश के दौरान होने वाली सामूहिक गतिविधियों में शामिल होने से समूह में काम करने की क्षमता विकसित होगी। बच्चे, अन्य बच्चों के विचारों को सुनने, समझने और उनको अपने विचारों से अवगत कराकर किसी निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया से अवगत होंगे।
  8. इस तरह के अवसर निरंतर मिलते रहने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। बच्चों में धारा प्रवाह पठन और किसी सामग्री को समझ के साथ पढ़ने का कौशल विकसित होगा।
  9. समझ के साथ पढ़ने की स्थिति को बेहतर करने के लिए बच्चों को पढ़ी हुई किताबों पर रोल प्ले करने का मौका देना एक अच्छी रणनीति हो सकती है। इससे बच्चे उस सामग्री के अर्थ को समझ सकेंगे और इसके साथ ही साथ उस अर्थ को अपनी भाषा में सहजता के साथ अभिव्यक्ति भी कर सकेंगे।
  10. बच्चे पढ़ने का आनंद लेंगे और अपनी एक पसंद-नापसंद भी विकसित करेंगे। इसका असर किताबों के चुनाव पर भी दिखाई देगा।
  11. ऐसा संभव है कि बच्चे शुरूआत में छोटी-छोटी किताबें ही पढ़ें क्योंकि इससे उनकी पढ़ी हुई किताबों की संख्या बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में बच्चों को बड़ी किताबों को पढ़ने का ‘रीडिंग चैलेंज’ भी देना होगा। ताकि वे बड़ी किताबों को भी पढ़ने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
  12. बड़ी किताबों को पढ़वाना एक चैंलेज है, इसके लिए एक कालांश निर्धारित करके कुछ चुनी हुई बड़ी किताबें बच्चों को देने और एक कालांश में पढ़ने का तरीका चीज़ों को आगे बढ़ाने में काफी मदद कर सकता है।
  13. इसके साथ ही साथ एक अन्य तरीका किसी रोचक फिक्शन या नॉन-फिक्शन किताब को धारावाहिक के रूप में सिलसिलेवार ढंग से भी बच्चों के लिए पढ़ा जा सकता है। यह काम रोज़ाना या फिर सप्ताह में कोई एक दिन किसी कक्षा विशेष के लिए निर्धारित करके किया जा सकता है।
  14. लाइब्रेरी में बच्चों को किताबों को पढ़ने व चुनने की स्वतंत्रता देना एक बेहतर रणनीति होगी। इसके साथ ही सथ उनको अपने विचारों की अभिव्यक्ति का अवसर दें ताकि वे लाइब्रेरी को एक ऐसी जगह के रूप में देख सकें जहाँ उनको अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। धीरे-धीरे यह बात पूरे स्कूल का हिस्सा बनने की दिशा में आगे बढ़ जायेगी।
  15. लाइब्रेरी के काम में बच्चों की भागीदारी को शुरू से ही शामिल करें। इससे आपका काम आसान हो जायेगा और इसके साथ ही साथ बच्चे लाइब्रेरी के काम को खुद से करने के लिए तैयार भी हो जाएंगे। किताबों का डिसप्ले बच्चों की पहुंच के अनुसार होगा। पोस्टर व चार्ट पेपर भी उनकी पहुंच के अनुसार लगेंगे क्योंकि बच्चों के शामिल होने से हमें खुद भी उनकी सुविधा का ध्यान रहेगा।

 

 

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x