पुस्तक चर्चाः बसंत में आकाश दर्शन

अंतरिक्ष,तारों और ग्रहों के बारे में जानने की इच्छा किसे नहीं होती! हर कोई इनके बारे में अधिक से अधिक जानने का प्रयास करता है। हर किसी के अंदर इन्हें लेकर उत्सुकता होती है और बहुत से प्रश्न भी। मेरे पास भी कई प्रश्न थे, हैं और आगे भी बने रहेंगे। लेकिन कुछ प्रश्नों के जवाब मुझे आज मिले। कैसे? तारों की सैर करके! तारों की सैर कोई कैसे कर सकता है? पर मैंने करी! चलिए अब दिमाग पर ज्यादा जोर मत डालिए। मैं ही बता देती हूं।

मैंने आशुतोष उपाध्याय की पुस्तक “बसंत में आकाश दर्शन” पड़ी। 29 पृष्ठों की यह पुस्तक आकाश को देखने के लिए मानो दुरबीन सी प्रतीत हुई। उनके लिखने की शैली और अंदाज ही ऐसा है की कठिन से कठिन चीज भी कहानी की तरह बड़े ही सरल भाव से लिखते हैं। इस पुस्तक के साथ भी कुछ ऐसा ही है। यह पुस्तक कई रोचक चीजों को अपने आप में अपने आप में समाए हुए है। जैसे-‘ तारों का मौसम’ , ‘विभिन्न नक्षत्र’, ‘आकाश दर्शन का सही समय’, तथा और भी कई रोचक चीज़ें। आज से पहले मैंने ‘स्काईमेप’ का नाम तो सुना था, लेकिन वह होता क्या है?मुझे पता ही नहीं था! लेकिन इस पुस्तक में बड़े ही सहज भाव से लेखक ने स्काईमेप के बारे में भी बताया है ।

वैज्ञानिक तथ्यों के साथ पौराणिक कथाएं

पुस्तक में वैज्ञानिक तथ्यों के साथ साथ कुछ पौराणिक कथाएं भी है। जैसे बड़े भालू और छोटे भालू की कहानी और ओरियन शिकारी की कहानी। बड़ी ही दिलचस्प है। पुस्तक में चित्रकला का भी बड़ी ही बेहतरीन ढंग से प्रयोग किया गया है। चित्र काफी हीआकर्षित करते हैं। पुस्तक में मुझे एक और बात बहुत अच्छी लगी। वह यह कि इसमें विभिन्न गतिविधियां दी गई है, जिनके द्वारा हम खेल खेल में और बड़े ही आसानी से इन चीजों का प्रैक्टिकल अनुभव कर सकते हैं ।

हां यह बात सच है कि मैंने अभी आसमान में तारे ढूंढने का प्रयास किया लेकिन धुँध के कारण मुझे कुछ नहीं दिख रहा। उम्मीद है कल मौसम साफ होगा और मैं भी तारों में कुछ नक्षत्र ढूंढ पाऊंगी। वैसे हो सकता है शुरुआत में मेरे विफल हो, लेकिन धीरे-धीरे मैं यह सीख जाऊंगी, ऐसी मुझे उम्मीद है।

(लेखक परिचयः दीपिका उत्तराखंड के नानकमत्ता पब्लिक स्कूल में दसवीं कक्षा में अध्ययनरत हैं। अपनी स्कूल की दीवार पत्रिका के सम्पादक मंडल से भी जुड़ी हैं। अपने विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों के साथ मिलकर एक मासिक अखबार भी निकालती हैं।”)

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1 Comment

  1. शानदार लेख !

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