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अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2024: ‘बहुभाषी शिक्षा को मिले प्रोत्साहन’

वैश्विक स्तर पर 8 सितंबर की तारीख को‘अन्तर्राष्टीय साक्षरता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इसका मकसद पूरी दुनिया में साक्षरता को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। ताकि दुनिया की एक बड़ी आबादी जो साक्षरता तक अपनी पहुंच बनाने से दूर है, उसे साक्षर बनाने (पढ़ना-लिखना सिखाने) के अभियान से जोड़ने में सफलता मिल सके।

हर वर्ष इसके लिए नई थीम का चुनाव किया जाता है। इस वर्ष 2024 के अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की थीम है “बहुभाषी शिक्षा को प्रोत्साहन: आपसी समन्वय और शांति के लिए साक्षरता”

पढ़ें: क्यों मनाते हैं अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस?

इस थीम के माध्यम से वैश्विक स्तर पर बहुभाषी शिक्षा (multilingual education) के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है। भारत से संदर्भ में यह थीम काफी प्रासंगिक है क्योंकि भारत मूलतः बहुभाषी लोगों का देश है। यहां के स्कूलों में स्कूल की भाषा और बच्चों के घर की भाषा में भी अंतर है, इसके कारण बच्चों को पढ़ना-लिखना सीखने और साक्षरता हासिल करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए भारत में बच्चों को मिलने वाली शिक्षा के लिए बहुभाषिकता का एक रणनीति के रूप में चुनाव बहुत मायने रखती है।

बहुभाषी शिक्षा को प्रोत्साहित करना है जरूरी

अगर हम बच्चों के घर की भाषा को L-1 कहें और स्कूल की भाषा को L-2 कहें, तो शुरूआती स्तर पर स्कूल आने वाले बच्चों के साथ बच्चों के घर की भाषा यानि L-1 का उपयोग बहुत जरूरी हो जाता है ताकि बच्चे कक्षा में होने वाली बातचीत, चर्चा और कक्षा में पढ़ाई जाने वाली सामग्री को समझ सकें और अपनी भाषा में जवाब दे सकें।

भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी प्राथमिक स्तर पर बच्चों के घर की भाषा के उपयोग को प्राथमिकता देने की बात करती है। इसके लिए विभिन्न भाषाओं में प्राथमिक स्तर पर पढ़ने वाले बच्चों के लिए कहानियों, कविताओं और अन्य शिक्षण सामग्री का विकास विभिन्न संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। लेकिन इसमें चुनौती है कि एक ही राज्य में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती हैं और विभिन्न भाषाओं में सामग्री विकसित करने और उसे प्रकाशित करने के लिए संसाधनों की आवश्यकता है, तभी ऐसे प्रयासों को सार्थकता मिल सकेगी।

प्राथमिक कक्षाओं के लिए भारतीय भाषाओं में विकसित हो बाल साहित्य

किसी देश की भाषायी विविधता वास्तव में एक संसाधन है, और इस विविधता को स्वीकार करने और उसे संपन्न बनाने व औपचारिक परिवेश में शिक्षा हासिल करने बच्चों के जीवन में सार्थक योगदान देने में बहुभाषिकता को अपनाना और उसे प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी हो जाता है। भारतीय भाषाओं में बाल साहित्य का विकास और ख़ासतौर पर प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के पठन स्तर व रुचि को ध्यान में रखते हुए करना बेहद जरूरी हो जाता है।

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