बेहतर संवाद के लिए जरूरी है ‘भयमुक्त माहौल’ भयमुक्त माहौल में होने वाला संवाद शिक्षक के लिए कितना जरूरी है? बता रहे हैं जितेंद्र महला। इस पोस्ट में पढ़िए उनके अनुभव। [...]
गरासिया, हिंदी और मारवाड़ीः क्या कहते हैं बच्चे? सातवीं और आठवीं कक्षा के बच्चों ने बताया कि अगर उनकी मातृभाषा में किताबें होतीं तो उनके लिए पढ़ना-समझना आसान होता। हिंदी की मुश्किलों को भी वे बड़ी बेबाकी से सामने रखते हैं। तो आइए 'बच्चों की दुनिया' में आज रूबरू होते हैं बच्चों की लिखावट से। [...]
बहुभाषिकताः क्लासरूम में हर भाषा का हो सम्मान बहुत से स्कूलों में बच्चों को अपनी मातृभाषा का इस्तेमाल करने से रोका जाता है। [...]