बेहतर संवाद के लिए जरूरी है ‘भयमुक्त माहौल’ भयमुक्त माहौल में होने वाला संवाद शिक्षक के लिए कितना जरूरी है? बता रहे हैं जितेंद्र महला। इस पोस्ट में पढ़िए उनके अनुभव। वृजेश सिंह, संस्थापक-संपादक, एजुकेशन मिरर | 28 फ़रवरी 2016
बाल संसार गरासिया, हिंदी और मारवाड़ीः क्या कहते हैं बच्चे? सातवीं और आठवीं कक्षा के बच्चों ने बताया कि अगर उनकी मातृभाषा में किताबें होतीं तो उनके लिए पढ़ना-समझना आसान होता। हिंदी की मुश्किलों को भी… 11 अक्टूबर 2015
सुर्ख़ियों में शिक्षा बहुभाषिकताः क्लासरूम में हर भाषा का हो सम्मान बहुत से स्कूलों में बच्चों को अपनी मातृभाषा का इस्तेमाल करने से रोका जाता है। 29 सितंबर 2015