बाल संसार गरासिया, हिंदी और मारवाड़ीः क्या कहते हैं बच्चे? सातवीं और आठवीं कक्षा के बच्चों ने बताया कि अगर उनकी मातृभाषा में किताबें होतीं तो उनके लिए पढ़ना-समझना आसान होता। हिंदी की मुश्किलों को भी वे बड़ी बेबाकी से सामने रखते हैं। तो… वृजेश सिंह, संस्थापक-संपादक, एजुकेशन मिरर | 11 अक्टूबर 2015