परीक्षाः ‘अरे! तुमको इतने नंबर कैसे मिल गए?’
परीक्षा के सवाल हल हो जाते हैं। लेकिन ज़िंदगी के सवाल ज़्यों के त्यों बने रहते हैं। आख़िर क्यों?
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परीक्षा के सवाल हल हो जाते हैं। लेकिन ज़िंदगी के सवाल ज़्यों के त्यों बने रहते हैं। आख़िर क्यों?
बिहार के कुछ स्कूलों में 'नकल 'की घटनाओं को पूरे प्रदेश की सच्चाई के बतौर पेश करने की कोशिश हो रही है।
आख़िर कब तक हमारे स्कूल, क़ॉलेज और विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं का डर कायम रहेगा? यह सवाल 21वीं सदी में और ज़्यादा प्रासंगिक हो गया है।