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स्कूल की आदर्श सभा कैसी होनी चाहिए?

प्रातःकालीन सभा किसी स्कूल का चेहरा होती है। जो स्कूल के होने के अस्तित्व को सार रूप में प्रस्तुत करती है। स्कूल की सभा में कुछ चीजें निश्चित होती हैं। तो कुछ चीजें परिवर्तनशील होती हैं। जिसका हमें सभा के बारे में नियोजन करते हुए ध्यान रखना चाहिए।


कोई गतिविधि हम करवाना चाहते हैं तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इससे किसकी क्षमता में इजाफा हो रहा है। कौन-कौन गतिविधि से किस-किस तरीके से प्रभावित हो रहे हैं। इससे हम प्रक्रिया में जागरूक होकर ज्यादा बेहतर ढंग से सोच सकते हैं। खुद से व लोगों के फीडबैक लेते हुए प्रधानाध्यापक प्रातःकालीन सभा को प्रभावी बना सकते हैं।

किसी भी परिवर्तन की प्रक्रिया में हमारा संवेदनशील होना बहुत जरूरी है। हो सकता है कि बच्चे प्रारंभ में बहुत प्रभावशाली तरीके से अपनी बात न रख पाते हों, उनको अपनी बात रखने में झिझक महसूस होती हो, उनको लोगों के सामने बोलने में दिक्कत महसूस होती हो, उनका पांव कांपता हों, उनकी धड़कन बढ़ जाती हो। तो इसके बारे में व्यक्तिगत तौर पर बात करना काफी फायदेमंद हो सकता है। इससे अगली बार जब उनका अवसर आएगा तो वे ज्यादा बेहतर तरीके से अपनी प्रस्तुति दे पाएंगे।

उपरोक्त तरीके हम स्कूल में बाल मनोविज्ञान के बारे में प्रधानाध्यापक व अध्यापकों से तात्कालिक जरूरतों व मुद्दों के बारे में बात कर सकते हैं। समस्याओं की पहचान कर सकते हैं। उनके समाधान के तरीकों के बारे में सोच सकते हैं। राह में आने वाली तमाम समस्याओं को चिन्हित करते हुए क्या रास्ता निकाला जा सकता है…उस दिशा में परिचर्चा को आगे बढाना। इससे हम उन तमाम तरीकों के बारे में सोच सकते हैं जो स्कूल के माहौल को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं। बच्चों व अध्यापकों दोनों के लिए पारस्परिक तरीके से सीखने-सिखाने का माहौल बनाने में मददगार हो सकते हैं।

प्रातःकालीन सभा के उद्देश्यः 

1.उसकी योजना
2. चुनी गई गतिविधि व कारण
3. प्रक्रिया (खुशी व सीखने का माहौल बना रहे)
4. अपेक्षित परिणाम जो उद्देश्य के अनुरूप हो।
5. दिन की शुरुआत
6. सबकी भागीदारी
7. आनंद की अनुभूति
8. समुदाय की भागीदारी
9. सुंदर माहौल
10. बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक

11. सबके एक साथ आने का मंच
12. विचारों का आदान-प्रदान
13. सबको अपने होने का एहसास दिलाने वाली हो
14. दिन की शुरुआत में प्रेरणा भरने वाला
15. स्कूल में आने का बहाना बन जाए
16. अनौपचारिक व औपचारिक लर्निंग स्पेस बन पाए
17. दो तरफा प्रक्रिया
18. संदर्भ स्थापित करने में उपयोगी- बच्चों के नाम प्रधानमंत्री का खत
19. पूरे दिन के लिए उर्जा की खुराक देने वाला
20. निश्चित समय
21. रिश्तों का संजाल मौजूद होता है
22. भयमुक्त वातावरण को स्थापित करने का प्रस्थान बिंदु
23. हल्के मूड के साथ-साथ – विचारों को भी शामिल करना
24. साथियों से सीखने की प्रक्रिया को प्रेरित करने वाली
25. ………………………बातें और भी हैं। अपने वास्तविक अनुभव से उपरोक्त बातों को समृद्ध करते हुए आगे बढ़ा सकते हैं।
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आपने सही फरमाया। लेकिन बच्चों से ज्यादा आपकी बात हम बड़ों पर लागू होती है।

Amrita Tanmay

ब्रम्ह बेला का महात्म्य यूँ ही नहीं है जो उर्जा से भरपूर होता है..ऊर्जा का सही क्रियान्वन उसी समय रुपरेखा पा लेता है..

आपने सही फरमाया। लेकिन बच्चों से ज्यादा आपकी बात हम बड़ों पर लागू होती है।

Amrita Tanmay

ब्रम्ह बेला का महात्म्य यूँ ही नहीं है जो उर्जा से भरपूर होता है..ऊर्जा का सही क्रियान्वन उसी समय रुपरेखा पा लेता है..

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