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कैसी होनी चाहिए भाषा की कक्षा?

भाषा शिक्षण की प्रक्रियाभाषा की कक्षा कैसी होनी चाहिए? इस सवाल के जवाब में कहा जा सकता है कि भाषा की कक्षा ऐसी होनी चाहिए जहां बच्चों को भाषा के उपयोग का अधिक से अधिक अवसर मिले. यहां उनको सुनने, बोलने और देखी हुई चीज़ों व अपने अनुभवों के बारे में बात करने का मौका मिलना चाहिए।

कक्षा में तस्वीरों का इस्तेमाल भाषा सिखाने के लिए होना चाहिए. बच्चों की बैठक व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमे हर किसी को भागीदारी का समान अवसर मिले. सबसे ख़ास बात की होल लैंग्लेज अप्रोच के साथ भाषा को उसकी संपूर्णता में बच्चों के सामने रखना चाहिए. ताकि वह भाषा का अर्थपूर्ण ढंग से आनंद उठाते हुए इसे सीख सके.

भाषा के शिक्षक को इस बात के प्रति जागरूक होना चाहिए कि बच्चा जब स्कूल में पढ़ने के लिए आता है तो उसके पास मूलभूत भाषिक कौशल पहले से मौजूद होता है. केवल उसे इसके विकास के लिए उसे बच्चे को उचित माहौल देना है ताकि बच्चे में भाषा संबंधी अन्य कौशलों जैसे पढ़ने और लिखने का विकास हो सके. कह सकते हैं कि पहली भाषा सीखने में बच्चे को आसानी होती है. इसके साथ-साथ यह तथ्य भी ध्यान देने योग्य है कि एक भाषा का सीखना दूसरी भाषा को सीखने में मदद करता है. तो देखते हैं भाषा शिक्षण की कक्षा की दस ख़ास बातें क्या हैं?

बिंदुवार ढंग से कहा जा सकता है कि

  1. भाषा की कक्षा में बच्चों को अपनी बात कहने का मौका मिलता हो.
  2. उनको अध्यापकों द्वारा रुचि के साथ सुना जाता हो
  3. अध्यापक बच्चों के साथ सहजता से बातचीत करते हों
  4. भाषा के विभिन्न उपयोगों का व्यावहारिक उपयोग किया जाता हो जैसे किसी से कोई भारी चीज़ उठाने के लिए कैसे कहोगे? इस तरह के सवालों से भाषा और काम के रिश्तों को स्पष्ट किया जा सकता है.
  5. भाषा का इस्तेमाल किसी घटना का वर्णन करने के लिए किया जाता है तो एक शिक्षक को बच्चों से आसपास की चीज़ों और उनके अनुभवों के बारे में बताने के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहिए.
  6. भाषा की कक्षा को सिर्फ़ किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. भाषा की कक्षा में किताबों के साथ-साथ अन्य सहायक सामग्री का इस्तेमाल किया जाना चाहिए
  7. जब बच्चा आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने लगे. उसे कुछ कविताएं जुबानी याद हो जाएं तो बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए
  8. जब एक बच्चा पढ़ना और लिखना सीख रहा हो तो उस अवस्था में अध्यापक को बड़ी संवेदनशीलता के साथ बच्चों की सहायता करनी चाहिए. उनकी मुश्किलों को आसान बनाते हुए कोशिश करने के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहिए.
  9. भाषा की कक्षा में होने वाली तमाम प्रक्रियाएं बच्चों के अनुभवों का हिस्सा बन जाएं, इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए. इसके लिए कक्षा कक्ष में होने वाली विभिन्न गतिविधियों की योजना बनाते समय बच्चों की रुचि और भाषा के स्तर का ध्यान जरूर रखना चाहिए
  10. भाषा की कक्षा में नए प्रयोगों और किसी काम को नएपन के साथ करने की गुंजाइश होनी चाहिए ताकि बच्चों के लिए भाषा सीखने की प्रक्रिया में कुछ नया करने का भाव बना रहे.

भाषा की कक्षा में अध्यापक की भूमिका काफ़ी महत्वपूर्ण होती है. एक भाषा की कक्षा को रोचक बनाने में उसका ख़ुद का अध्ययन और अनुभव मददगार होता है. उसे इस संबंध में जितनी जानकारी होगी. वह खुद नई चीज़ों को सीखने और संदर्भों के साथ भाषा को जोड़ते हुए बच्चों के सामने रख सकेगा, बच्चों को सीखने में उतनी सहूलियत होगी. व्याकरण भाषा का एक महत्वपूर्ण पहलू है. लेकिन एक स्तर की भाषा सीखने के बाद बच्चों को अगर व्याकरण से परिचय होता है तो वे तेज़ी से अपनी भाषा को व्याकरण से मुताबिक़ व्यवस्थिति करने में सक्षम होते हैं.

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